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बिना चीनी फीके रह सकते हैं गरीबों के त्यौहार

बिना चीनी गरीबों के त्यौहार फीके रह सकते हैं। मिष्ठान को तरस जाएंगे। अभी तक इनकी चीनी का सरकार की ओर से कोई इंतजाम नहीं। तीन महीने से गरीब परिवार चीनी के इंतजार में हैं। अगस्त महीने की चीनी बुलंदशहर शूगर मिल से मिलनी थी, लेकिन मिल ने इससे इंकार कर दिया है। ऐसे में अगस्त महीने की चीनी भी मिलने के आसार नहीं रह गए हैं। इधर, त्यौहारी सीजन शुरू हो गया है।

गन्ना उत्पादन में कमी के चलते अधिकांश चीनी मिलों के पास लेबी स्टॉक नहीं। कुछ मिल ऐसी हैं, जो लेबी स्टॉक की चीनी देने से बच रही हैं। इसके चलते पिछले तीन महीने से गरीबों को चीनी नहीं मिल सकी है। इससे गरीबों से मिठास दूर होती जा रही है।


फरीदाबाद में बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या 50 हजार 26 है। एक महीने में एक परिवार को 2 किलोग्राम के हिसाब से चीनी दी जाती है। लेकिन चीनी न आने से अप्रैल, जून व जुलाई की चीनी अभी तक गरीबों को नहीं मिल सकी है। अगस्त में रक्षा बंधन का त्यौहार है। इसी महीने मुसलमानों का रमजान का महीना शुरू होगा। गरीबों को उम्मीद थी कि त्यौहार तक उन्हें चीनी मिल जाएगी। ऐसा नहीं हुआ। उधर, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सूत्रों के मुताबिक अगस्त महीने की चीनी बुलंदशहर शूगर मिल से आनी थी। लेकिन उस शूगर मील ने लेबी की चीनी देने से इंकार कर दिया है। इससे गरीबों को अगस्त महीने में चीनी मिलने के आसार नहीं है। विभाग अब इस बारे में निदेशालय को लिखकर अवगत कराएगा। दरअसल, चीनी महंगी होने से शूगर मिल प्रबंधक लेबी की चीनी सरकार को देने से बच रहे हैं। क्योंकि मिलों को  यह चीनी कंट्रोल रेट पर सरकार को देनी होती है। जबकि इन दिनों बाजार में चीनी के दाम इससे कहीं अधिक है। ऐसे में चीनी मिली चीनी देन में आनाकानी कर रही हैं।

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