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खूब भा रहा है ’तालिबान’ का हंसमुख चेहरा

खूब भा रहा है ’तालिबान’ का हंसमुख चेहरा

पाकिस्तान में एक ऐसा तालिबान आया है, जो लोगों को सताने की बजाए हंसाने का काम कर रहा है। खास बात यह है कि यह कोई संगठन न होकर एक टीवी चैनल ‘चैनल टी’ है, जो लोगों का हिंसा से ध्यान हटा कर उन्हें हंसाने की कोशिश कर रहा है। चैनल को देश में खासी लोकप्रियता मिल रही है।

चैनल के एक शो के दो तालिबान प्रस्तुतकर्ता पश्तो लहजे में उर्दू बोलते हैं, दोनों कार्यक्रम की शुरुआत में एक अहम घोषणा करते हैं कि चैनल में महिलाओं के विचार शामिल नहीं किए जाएंगे। कार्यक्रम का पहला चरण एक पुरस्कार समारोह से शुरू होता है, जिसके तहत एक महिला को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिलता है, लेकिन वह महिला होने के नाते टीवी पर नहीं दिखाई जा सकती।

अगला चरण मूक चरण है क्योंकि समारोह के दौरान महिला को एक गीत प्रस्तुत करने को कहा जाता है। चूंकि तालिबान की सत्ता के तहत महिला स्टेज पर प्रदर्शन नहीं कर सकती, इसलिए उसे पूरी तरह ढक कर दशर््ाकों की ओर पीठ किए हुए दिखाया जाता है।

कार्यक्रम के निर्माता युनूस बट ने कहा यह आतंकियों का कच्चा चिट्ठा खोलने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है, ताकि सामान्य लोगों को उनसे सहानुभूति न रहे। इसी तरीके से हम उन्हें अलग करके उनसे लड़ सकते हैं।

चैनल पर सामान्य शो के साथ आम चैनलों की तर्ज पर एक फूड शो और टॉक शो भी प्रस्तुत किया जाता है। टॉक शो आज मुस्लिम खान के साथ स्वात घाटी के जाने-माने तालिबान प्रवक्ता मुस्लिम खान के संदर्भ में है। दूसरी ओर फूड शो में पुरूषों को सलाह दी जाती है कि वे पुरूष प्रस्तुतकर्ता से व्यंजनों की विधि सीखकर उन्हें अपने घर की महिलाओं को सिखाएं क्योंकि महिलाएं पुरूष खानसामे से खाना पकाना नहीं सीख सकतीं।

हर घंटे समय बताने के लिए चैनल पर गोलीबारी की जाती है। तालिबान प्रस्तुतकर्ता समझाते हैं कि अगर तीन गोलियां चल रहीं हैं तो आप समझ जाइए कि तीन बज रहे हैं। चैनल का एक अन्य अहम शो वीओए या वॉइस ऑफ अलकायदा है, जहां दाढ़ी वाले आतंकी दर्शकों को ब्रेकिंग न्यूज की जानकारी देते हैं।

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