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एडवोकेट आरके आनंद की सजा बरकरार

एडवोकेट आरके आनंद की सजा बरकरार

उच्चतम न्यायालय ने बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू मामले में विवादास्पद गवाह सुनील कुलकर्णी को प्रभावित करने का प्रयास करके अदालत की अवमानना करने वाले एडवोकेट आरके आनंद की सजा को बरकरार रखा।

न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल, न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति आफताब आलम की पीठ ने विशेष लोक अभियोजक आईयू खान को सजा से राहत दे दी। दिल्ली उच्च न्यायालय आनंद और खान पर चार माह तक प्रेक्टिस करने पर रोक पहले ही लगा चुका है।

एक न्यूज चैनल द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन की आलोचना का हवाला देते हुए उच्चतम न्यायालय ने इस बात को रेखांकित किया कि यह मीडिया ट्रायल का मामला नहीं, बल्कि जनहित में किया गया एक स्टिंग था। खान को बरी करते हुए उच्चतम न्यायालय ने पाया कि मामले में विशेष लोक अभियोजक के रूप में उनका आचरण उचित नहीं था।

खान और एडवोकेट आनंद को बीते साल 21 अगस्त को दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुलकर्णी नामक एक गवाह को प्रभावित करने का दोषी पाया था। एक टेलीविजन चैनल के स्टिंग ऑपरेशन से इस बात का खुलासा हुआ था। अदालत ने खान और आनंद को न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने का दोषी पाया था और सजा के रूप में उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय और अन्य अधीनस्थ अदालतों में प्रेक्टिस करने पर चार माह की रोक एवं दोनों पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने खान और आनंद को वरिष्ठ वकील के पद से भी हटा दिया था।

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