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बुकर पुरस्कार की दौड़ में एक भी भारतीय नहीं

बुकर पुरस्कार की दौड़ में एक भी भारतीय नहीं

लेखन के क्षेत्र का प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार इस बार किसी भारतीय की झोली में जाने की संभावना नहीं है। बुकर पुरस्कार की दौड़ में इस बार किसी भारतीय का नाम नहीं है, दूसरी ओर जाने-माने लेखक जेएम कोएटजी का नाम पुरस्कारों की दौड़ में तीसरी बार शामिल किया गया है।

पुरस्कार की दौड़ में शामिल 13 पुस्तकों की सूची की मंगलवार को घोषणा की गई। इसमें कोएटजी की पुस्तक ‘समरटाइम’ का नाम शामिल है। उन्हें इसके पूर्व 1983 और 1999 में भी यह पुरस्कार मिल चुका है। पिछले वर्ष भारतीय लेखक अरविंद अडिगा को ‘द व्हाइट टाइगर’ के लिए बुकर पुरस्कार मिला था।

सट्टेबाजों के आकलन के अनुसार पुरस्कार इस बार भी कोएटजी को ही मिलने की संभावना है। सूची में एएस ब्याट की ‘द चिल्ड्रंस बुक’, एडम फोल्डस की ‘द क्विकनिंग मेज’, सराह हॉल की ‘हाउ टू पेंट ए डैड मैन’, सामंथा हार्वे की ‘द वाइल्डरनेस’ और जेम्स लीवर की ‘मी चीता’ भी शामिल हैं।

सूची में हिलेरी मेंटल को वोल्फ हॉल, सिमोन मावेर को द ग्लास एम, जेम्स स्कूडामोर को हेलियोपोलिस, कोल्म तोइबिन को ब्रुकलिन, विलियम ट्रेवर को लव एंड समर और साराह वाटर्स को द लिटिल स्ट्रेंजर के लिए भी जगह मिली है।

पुरस्कार निर्णायक मंडल के अध्यक्ष जेम्स नौटी ने कहा इस वर्ष 13 उपन्यासों की लंबी सूची को देखते हुए पांच जजों की नियुक्ति की गई है। हमें लगता है कि यह हाल  के वर्षों में सबसे लंबी सूची है, जिसमें दो भूतपूर्व विजेता, चार पूर्व में भी चयनित और तीन पहली बार शामिल हुए उपान्यासकार शामिल हैं।

लंबी सूची में से छांटे गए उपन्यासों की सूची की घोषणा आठ सितंबर को की जाएगी, वहीं विजेता की घोषणा छह अक्टूबर को होगी। नौटी के अलावा निर्णायक मंडल में आलोचक लुकास्टा मिलर, संडे टेलीग्राफ के लेखन संपादक माइकल प्रेाजर, शिक्षणविद और पत्रकार प्रो़ जॉन मुलन और पत्रकार स्यू पर्किंस शामिल हैं।

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