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दो टूक

दिल्ली से हमें कई शिकायतें हैं। उसकी भीड़, उसका ट्रैफिक, उसके जाम - सबसे हमें शिकवा है। इस शहर को पीटने का कोई मौका हम नहीं छोड़ते। लेकिन कभी किसी रोज उसकी पीठ भी थपथपानी चाहिए।

राजधानी की हरीतिमा लगातार बढ़ रही है। पार्क, पेड़, घास, पौधे, गमले, फूल, कांटे, झड़ियां - सबकी तादाद बढ़ रही है। मुख्यमंत्री की मानें तो दो बरस में 30 फीसदी शहर हरियाली से ढका होगा। यह तब है जब दिल्ली में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी है।

इसका श्रेय सरकार को भी जाता है और पब्लिक को भी। वनस्पति के लिए दिल्ली वालों का सच्च प्रेम उनके शहर का दुनिया भर में ओहदा बढ़ा रहा है। माना कि शहर की नाकामयाबियों का अंधेरा बड़ा घना है। पर हरियाली के आंकड़े का एक दीया तो जल रहा है न!

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