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फरियादी ही फंसा फर्जीवाड़ा के खेल में

प्राधिकरण मित्र दिवस में एक फरियादी ही फर्जीवाड़ा के खेल में जीडीए के जाल में फंस गया। सुनवाई व जांच में उसपर  कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जीडीए के मकान हड़पने का मामला उजगर हुआ। प्राधिकरण की ओर से फरियादी वेदप्रकाश के खिलाफ थाने में मुकदमा दर्ज कराने के ओदश हुए,जबकि तत्कालीन संयुक्त सचिव व उस पटल के बाबू के हस्ताक्षर के सत्यापन कराने के। इसके अतिरिक्त निरस्त मकानों के दुबारा आंवटन के भी दो मामले प्राकश में आने के बाद संबंधित बाबू के खिलाफ जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव दिया गया।


 संयुक्त सचिव लालचंद मौर्य ने बताया कि मित्र दिवस में इंदिरापुरम क्षेत्र में आवंटित दो-तीन मामलों में फर्जीवाड़े पकड़ में आए। न्याय खंड द्वितीय के वेदप्रकाश द्वारा 492सी को अपना बताकर बकाया धनराशि जमा कराने का अनूरोध किया गया था। लेकिन जंच में मामला कुछ और निक ला। जंच में उजगर हुआ कि यह मकान कहीं से परिवर्तित कर लिया गया है। परिवर्तन पत्र पर तत्कालीन अधिकारी व पटल के बाबू के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। फर्जी कागज से मकान हड़पने के आरोप में वेदप्रकाश के खिलाफ मुकदमा कराने को कहा गया। अंबेडकर रोड के दुकानदारों द्वारा दुकान के बरामदे को बंद करने की शिकायत पर एक सप्ताह का समय दिया गया। ऐसा न होने पर जीडीए खुद कार्रवाई करेगा। न्यायखंड में दिलावर सिंह द्वारा मकान की रजिस्ट्री हेतु ओवदन किया गया लेकिन जंच में पता चला कि उक्त भवन पैसा ने जमा करने पर वर्ष 02 में निरस्त कर किसी अन्य को आंवटित कर दिया गया। निरस्त करने वाले बाबू पर गाज गिर सकती है क्योंकि आंवटी द्वारा काफी पैसा जमा करा दिया गया था। स्वर्ण जयंती पुरम में कविता बिखानी द्वारा पति को आंवटित भूखण्ड पर नामान्तरण का अनुरोध किया गया था, लेकिन मामला पेंचीदा हो गया। पति की मौत के बाद महिला ने 2000 में नामान्तरण हेतु अखबारों में विज्ञापन भी छपवाया गया इसके बाद भी 02 में आंवटन निरस्त कर दिया गया। मौर्य ने बताया कि इस मामले में भी संबंधित कर्मचारी के विरूद्ध जिम्मेदारी तय करने के बाद कार्रवाई होगी।

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