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राखियां खरीद ली मगर भाई ही नहीं रहे

भाइयों के लिए सुनीता ने राखी तो खरीद ली मगर बांधने के लिए कलाई नहीं रही। हर साल की तरह इस बार सुनीता की राखी के लिए उसके दोनों छोटे भाई जिंदा नहीं हैं। हादसे में सुनीता की एक बहन और दोनों भाई मौत की नींद सो गए। इस बात से अंजन कि अब उसके परिवार में कोई नहीं बचा है, यह आठ साल की बच्ची राखी के लिए अपने बाबा से नोएडा आने की जिद कर रही है।


सुनीता के पिता नंद किशोर, मां रामरती, चार साल का भाई खिल्ली, डेढ़ साल का भाई अजय और दीपा (6साल) हादसे में मारे गए। पूरे परिवार में सुनीता अब अकेली रह गई है। सूचना मिलने पर छतरपुर (मध्य प्रदेश) से पोस्टमार्टम हाउस आए सुनीता के रिश्तेदार रामबाबू ने बताया कि सुनीता छतरपुर में रहती है। कुछ माह सुनीता नोएडा रहकर अपने बाबा के संग छतरपुर गई है। राखी पर सुनीता दो-तीन दिन में नोएडा आने वाली है, जिसको लेकर उसने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। सुनीता ने अपनी पंसद से दो सुंदर राखियां खरीदी हैं। यहीं नहीं, खूबसूरत सी एक ड्रेस भी खरीदी है मगर उस बेचारी को क्या पता कि जिनके लिए उसने राखियां खरीदी हैं वो अब इस दुनिया में नहीं रहे। रामबाबू ने बताया कि सुनीता को अभी तक इस बात की जानकारी नहीं दी गई है और कोशिश भी यहीं की जा रही है कि उसे यह बात न बताई जाए।

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