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12 घंटे बाद प्लास्टर, न खून न पानी

एक साथ इतनी तादात में मरीजों के अस्पताल में पहुंचने से मची अफरातफरी ने जिला अस्पताल की असली तस्वीर अधिकारियों के सामने लाकर रख दी। सोमवार देर रात अस्पताल लाए गए हादसे के शिकार फ्रेक्चर के मरीजों को सुबह दस बजे प्लास्टर चढ़ाना शुरू किया गया। रात में मरीजों को जरूरत पड़ने पर न तो खून चढ़ाया जा सका और न ही डेक्ट्रोज वाटर। वार्ड में इतनी गंदगी थी कि इसके लिए प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) निरुपमा सिंह को जमकर फटकार पड़ी। एडी, स्वास्थ्य मेरठ ने भी अस्पताल की दुर्दशा पर नाराजगी जहिर की।
सोमवार रात से मंगलवार दोपहर तक अस्पताल में अफरातफरी का माहौल रहा। मरीज दर्द से कराह रहे थे मगर उन्हें प्लास्टर नहीं चढ़ाया जा रहा था।

अस्पताल के आर्थोपेडिक सजर्न डॉ. शेखर यादव ने कहा कि रात में एक्सरे विभाग बंद होता है। एक्सरे किए बिना प्लास्ट चढ़ाना संभव नहीं है। यही वजह है कि मंगलवार को एक्सरे के बाद घायलों को प्लास्टर चढ़ाया गया। सुबह से ही बसपा के सांसद सुरेंद्र सिंह नागर, जिला प्रशासन के अधिकारियों व संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य, मेरठ जी. सी. चतुव्रेदी के घायलों की कुशलक्षेम जनने का सिलसिला जरी रहा। जी. सी. चतुव्रेदी ने वार्ड में गंदगी पर नाराजगी जहिर की, जिसके बाद तुरंत वार्ड की सफाई करवाई गई। परिजनों के बैठने के लिए स्टूल तक नहीं थे, जो प्रभारी सीएमएस डा. निरुपमा सिंह को फटकार मिलने के बाद स्टोर से तुरंत मंगाए गए।

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