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सचिवालय में चहल पहल बढ़ने के साथ ही शुरू हुई नये साहबों की चर्चा

‘यह तो गजब हो गया! किसी को इसका अंदाजा भी नहीं था। क्या कीजिएगा अच्छा काम तो पे करता ही है। साहब सचिवालय से बाहर निकले नहीं कि लोक सेवा आयोग का दरवाजा खुल गया ...।’ मंगलवार की सुबह मुख्य सचिवालय में चहल पहल बढ़ने के साथ ही चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी। सभी इस सूचना पर स्तब्ध थे कि समय से पहले मुख्य सचिव बदल दिये गये।

सोमवार को दफ्तर बंद होने तक ऐसी कोई चर्चा भी नहीं थी। प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों का सिलसिला तो दिन में ही शुरू हो गया था। लेकिन मुख्य सचिव के बदलने को लेकर किसी प्रकार की अटकल भी नहीं लगाई जा रही थी। अचानक देर रात हुए इस फैसले ने मंगलवार की सुबह मुख्य सचिवालय का ‘रंग’ ही बदल दिया। मुख्य सचिव आर.जे.एम पिल्लै सुबह पौने दस बजे कार्यालय कक्ष में बैठ गये। लेकिन कर्मचारियों और अधिकारियों की  उत्सुकता अब नये साहब अनूप मुखर्जी के बारे में जानने में ज्यादा थी।

श्री मुखर्जी दो अगस्त से मुख्यसचिव होंगे लेकिन कई अधिकारी उनके वर्तमान विभाग में अपने साथी अधिकारियों से यह जानकारी लेने में मशगूल थे कि उनके नये साहब किस मिजाज के हैं।  मंगलवार को दफ्तर खुलने के बाद कुछ यही स्थिति उन सभी विभागों की थी जहां के प्रधान सोमवार को हुए तबादलों से प्रभावित हुए है। सचिवालय कर्मियों के बीच मुख्यत: वित्त सचिव और मुख्य सचिव ही चर्चा में थे। उनकी चिंता सिर्फ छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर थी।

किसी-किसी विभाग में प्रीमियर सेवा को लेकर भी चर्चा हो रही थी। हालांकि चर्चा का सबसे दिलचस्प अंदाज था आवास बोर्ड के कर्मचारियों का। वहां कर्मचारियों का एक दल बाहर चाय की दुकान पर कुछ इस अंदाज में बात कर रहा था जसे उन्हें किसी बड़ी परेशानी से मुक्ति मिल गई हो। पुल निर्माण निगम के कर्मचारी भी परेशान दिखे। उन्हें इस बात की तकलीफ थी कि बोर्ड को लाभ में लाकर उनकी नौकरी बचाने वाले आधिकारी का तबादला हो गया।

बहरहाल मंगलवार को राज्य के सचिवालय और बोर्ड-निगमों के आसपास दो तीन घंटे बिताने वाले किसी भी शख्श से उसके उसके अनुभवों के बारे में पूछेंगे तो जो जवाब मिलेगा उसका लब्बोलुआब यही होगा। कही कहीं दीप जले कहीं दिल! लेकिन कर्मचारी संघों के नेता इस बदलाव को शुभ संकेत मानते हैं।

सचिवालय सेवा संघ के महामंत्री अनिल कुमार का कहना है कि नये मुख्य सचिव और वित्त सचिव कर्मचारियों के हित में काम करने वाले हैं। हालांकि इन पदों  पर बैठने वाले हर अधिकारी की यही विवशता होती है कि सरकार के पक्ष में ही उन्हें सोचना पड़ता है। बिहार राज्य सचिवालय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष अविनाश प्रणय का मानना है कि इस बदलाव से बहुत प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।

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  • Web Title:शुरू हुई नये साहबों की चर्चा