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दो टूक

मर्ज का इलाज उसकी पहचान से ही शुरू होता है। अच्छी बात है कि मेट्रो के खंबों की दरारें छिपी नहीं रहीं। मेट्रो नाम का करिश्मा दिल्ली-एनसीआर में हजारों खंबों पर खड़ा है। उनमें से दजर्न-डेढ़ दजर्न की दरार पर चिंता की जरूरत नहीं। खासतौर पर तब, जब एक्सपर्ट कह रहे हों कि कंक्रीट की सतह पर दरारें आम बात है।

लेकिन फिर भी उनकी जांच हो रही है तो यह सावधानी सराहनीय है। मेट्रो मैन श्रीधरन पर देशवासी विश्वास करते हैं। उनका सम्मान करते हैं। उम्मीद है वे इस विश्वास की लाज रखेंगे। भले ही फेज-2 की लाइनें लक्ष्य से हफ्ते दो हफ्ते देरी से शुरू हों। भले ही नोएडा में मेट्रो की सीटी अगस्त की बजाय सितंबर में बजे। लेकिन वे दरारों पर पूरी तसल्ली कर लें। जांच मुकम्मल कर लें। क्योंकि कंक्रीट की दरारें तो जल्दी भर जाती हैं, भरोसे की नहीं!

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