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खर्राटों से छुटकारा

खर्राटे नींद में सांस भरते वक्त तालू के झंकृत होने से पैदा होते हैं। कभी-कभी तालू के साथ होंठ, गाल और नासिका भी इस आलाप में शामिल हो जाते हैं और शोर बढ़ जाता है।

तरह-तरह के कारण : नाक बंद हो, जुबान जरूरत से ज्यादा बड़ी हो, मोटापा, टॉनसिल्स या एडिनवाइड्स बढ़े हों, गले की पेशियां शिथिल पड़ जाएं, हाला का असर हो या श्वास प्रणाली के मार्ग में कोई रुकावट हो, तो खर्राटे आते हैं। 

स्लीप एप्निया का सच : समस्या गंभीर तब होती है जब कोई सोते हुए बीच-बीच में कुछ पलों के लिए सांस लेना बंद कर देता है। इससे उसके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है, वह चौंककर नींद से उठता है और फिर से गहरी सांस लेना शुरू कर देता है। यह विकार स्लीप एन्पिया कहलाता है। स्लीप एन्पिया होने पर रात की पूरी नींद लेने के बाद भी ताजगी महसूस नहीं होती, दिनभर आलिस्य छाया रहता है, मानसिक एकाग्रता और स्मृति ह्रास होने लगता है, स्वभाव चिड़चिड़ा, रक्तचाप बढ़ जाता है, दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है, फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं का दाब बढ़ जाता है। बेहतरी इसी में है कि जल्द किसी ईएनटी सर्जन या स्लीप लैब विशेषज्ञ से इलाज कराएं। करवट लेकर सोएं। सीधे पीठ के बल सोने की बजाय एक करवट सोना शुरू कर दें। शरीर बहुत थका हो तो खर्राटे आने स्वाभाविक हैं। समय से सोना शुरू कर दें।

नाक खुली रखें : नाक के अंदर की सेप्टम तिरछी हो, नाक में पौलिप हो या नाक बंद रहती हो तो किसी ईएनटी सर्जन से जांच करवाएं। एलर्जी पर काबू पाएं। धूल, पराग कण, फफूंद और जीव-जंतुओं के शरीर से झड़ने वाले बाल और दूसरे ऊतकों से एलर्जी होने पर भी श्वसन मार्ग आंशिक रूप से अवरोधित होता है। मदिरा से परहेज करें। वजन घटाएं।

दवा का दोष : नींद की गोलियां और एलर्जीरोधक दवाएं भी श्वसन मार्ग की पेशियों को सुस्त बनाती हैं जिससे खर्राटे आते हैं।

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