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बेहतर रोजगार के 3 विकल्प

मैट्रो टेक्नॉलोजी

मेट्रो टेक्नॉलोजी देश के 12 शहरों में विस्तार ले रही है, इसलिए इसमें मैन पावर की काफी जरूरत है। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी, दिल्ली’ और ‘दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन’ संयुक्त रूप से मेट्रो टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण देने के लिए प्रोफेशनल्स तैयार कर रहे हैं।

कोर्स के विषय में कोआर्डिनेटर के.एन.झा ने बताया, ‘एक वर्ष के प्रोग्राम में 12 कोर्स हैं। इसमें टेक्नॉलोजी और कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट के साथ विशेष रूप से मेट्रो के विषय में भी जानकारी दी जा रही है।’ इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को सिग्नल, टेलीकम्युनिक्शन इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही दुनिया की मेट्रो टेक्नॉलोजी की विशेष जानकारी दी जाती है।

कैंडिडेट्स को 20,000 रु. प्रति माह का स्टाइपंड दिया जाता है। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों को जो सुविधाएं दी जाती हैं, वे सभी मिलती हैं। जो प्रशिक्षण दिया जाता है, वह बहुत ही महत्वपूर्ण है और कोर्स में इंडस्ट्री की कार्य पद्धति की बहुत अच्छी जानकारी दी जाती है। कैंडिडेट्स जब कोर्स पूरा कर लेते हैं तब वे जिस शहर में चाहें, वहां के अधिकारियों के साथ काम कर सकते हैं। मेट्रो सर्विसेज में वे असिस्टेंट मैनेजर के रूप में कार्य शुरू कर सकते हैं।

डीएमआरसी के प्रवक्ता अनुज दयाल कहते हैं, ‘भारत में मेट्रो रेल सिस्टम में कंस्ट्रक्शंस और ऑपरेशन दोनों विभागों में प्रशिक्षत इंजीनियरों की बहुत आवश्यकता है। डीएमआरसी और आईआईटी दिल्ली युवा इंजीनियरों की भर्ती कर रहे हैं और उन्हें योग्य बनाने के लिए प्रैक्िटकल अनुभव की सुविधा दे रहे हैं।’

योग्यता : बी. टेक बी.आर्क डिग्री
इंस्टीट्यूट : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
www.iitd.ac.in

कैरियर के विकल्प कोर्स पूरा करने के बाद कैंडिडेट जिस शहर में चाहे कार्य कर सकता है। एसिस्टेंट मैनेजर के रूप में उसकी शुरुआत होगी।

प्रारंभिक वेतनः बेसिक सैलरी 11000 रु. (इसके अतिरिक्त अन्य सुविधाएं।)

एकाउंटिंग प्रोफेशनल्स
हाल की वश्विक मंदी और दुनिया में हो रहे बदलाव के कारण फाइनेंस प्रोफेशनल्स पर दबाव और बढ़ गया है। ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’ कोलकाता में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कॉस्ट एकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेट्रीज के लिए 18 महीने का ‘जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम फॉर एकाउंटेंट्स’ कोर्स है। यह कोर्स उनके लिए है जो कॉरपोरेट सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं और आगे चल कर सीईओ और सीएफओ बनना चाहते हैं।

यह कोर्स तीन टर्म का है। इसमें फाइनेंशियल रिस्क मैनेजमेंट, फाइनेंशियल स्टेटमेंट एनालिसिस और बिजनेस वल्यूएशन, कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग आदि विषय पढ़ाए जाते हैं। दूर-दूर के विद्यार्थी सेंट्रल फैकल्टी से विचारों का आदान-प्रदान कर सकें, इसकी भी व्यवस्था है। इसके लिए लाइव ब्रॉडकास्ट वीडियो, टू वे आडियो तथा डाटा इंटर एक्िटविटी की व्यवस्था है।

एकाउंटिंग प्रोफेशनल्स वरिष्ठ प्रबंधन के कार्य की जरूरत के हिसाब से अपनी योग्यता के विकास का फायदा उठा सकते हैं। यह कोर्स विभिन्न प्रकार के कंपटीशन में ‘एडवांस बिजनेस स्ट्रेटिजीज’ में आपको गाइड कर सकता है। प्रोफेशनल्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर कोर्स तैयार किया गया है। इस कोर्स को करने में 2.70 लाख रु. खर्च होते हैं।

योग्यता : चार्टर्ड एकाउंटेंट्स/कॉस्ट एकाउंटेंटस/कंपनी सेक्रेटरीज
इंस्टीट्यूट्स : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता
www. mcal. ac. in

करियर विकल्प : एकाउंटिंग प्रोफेशनल्स कॉरपोरेट सेक्टर में ज सकते हैं और सीईओ और सीएफओ के पद तक पहुंच सकते हैं।

प्रारंभिक वेतन : 15 से 40 लाख रु. प्रति वर्ष

‘क्लिनिकल रिसर्च‘ में संभावनाएं

‘क्लिनिकल रिसर्च’ के क्षेत्र में जॉब की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ‘मैकेंजी एंड कं.’ के एक अनुसंधान के अनुसार 2013 तक भारत में इस क्षेत्र में लगभग 50,000 प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। इस समय इनकी संख्या 10,000 है। आने वाले तीन-चार वर्षो में दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियां ‘क्लिनिकल रिसर्च’ पर भारत में 5,100 करोड़ से 7,650 करोड़ रु. तक खर्च करेंगी। इस समय उनका खर्च 1,530 करोड़ रु. है। अत: ‘लाइफ साइंस’ व ‘बॉयो साइंस’ ग्रेजुएट्स के लिए जॉब की काफी संभावनाएं होंगी।

‘क्लिनिकल रिसर्च’ के क्षेत्र में डाटा मैनेजमेंट, मेडिकल राइटिंग, रेगुलेटरी अफेयर, फार्मा कोविलिजेंस, क्वालिटी, एश्योरेंस, लेबोरेटरी टेक्नीशियंस, स्टेटिस्टिशियंस और बिजनेस डेवलपमेंट आदि हैं। देश में कुछ संस्थाओं ने इतनी मांग को देखते हुए ‘क्लिनिकल रिसर्च’ प्रोग्राम शुरू कर दिए हैं।

इस क्षेत्र में अच्छी योग्यता की जरूरत है क्योंकि दवाओं के विकास की प्रक्रिया का यह एक बहुत महत्वपूर्ण भाग है। ‘क्लिनिकल रिसर्च एजुकेशन एंड मैनेजमेंट’ के चेयरमैन विजय मोज ने बताया, ‘यह मनुष्यों पर नई दवाओं का सुनिश्चित प्रयोग है जो मनुष्यों की सुरक्षा और प्रभाव क्षमता की जानकारी के लिए किया जाता है।’

‘यूनिवर्सिटी ऑफ पुणो’, ‘बायो इन्नोवट रिसर्च सर्विसेज’ के सहयोग से क्लिनिकल रिसर्च और डाटा मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध कराता है। इस कोर्स के लिए एमबीबीएस/बीडीएस/ बीएएमएस/बीएचएम/बीई/बी टेक/बी फॉर्मेसी/एमसीए/एमबीए/एमएससी/एम फॉर्मा/एमए (गणित या सांख्यिकी) की योग्यता आवश्यक है।

एक वर्ष का अनुभव रखने वाले साइंस ग्रेजुएट भी आवेदन कर सकते हैं। ‘क्लिनिकल रिसर्च एजुकेशन एंड मैनेजमेंट’ ने भी एक वर्ष का पीजी डिप्लोमा शुरू किया है। इसमें ‘क्लिनिकल रिसर्च’ के आवश्यक सिद्धांतों तथा दवाओं की क्षमता से संबंधित शिक्षा दी जाएगी। प्रबंधन, फाइनेंस, मानव संसाधन प्रबंधन, आउट सोर्सिग की ही संक्षिप्त जनकारी दी जाएगी।

योग्यता : साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट या एक वर्ष का कार्य अनुभव।
इंस्टीट्यूट्स : यूनिवर्सिटी ऑफ पुणो, www. clinicpune. org

क्लिनिकल रिसर्च एजूकेशन एंड मैनेजमेंट, मुम्बई www. cremaindia. org
करियर के विकल्प : क्लिनिकल रिसर्च इंड्स्ट्री या फॉर्मा कंपनियों में जॉब मिल सकती है।
प्रारंभिक वेतन : 2 से 4 लाख रु. प्रति माह

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