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पूर्व राष्ट्रपति बड़े या कंपनी बड़ी

हमारे पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी अमेरिकी कंपनी के विमान से यात्रा करने गए तो उन्हें आम यात्रियों की तरह एक पंक्ति में खड़ा कर दिया गया। उनकी सरेआम जामातलाशी ली गई- जेब, मोबाइल की बात तो छोड़िए उनके जूते तक उतरवा लिए गए। वे तो आज कुर्सी परनहीं हैं, लेकिन जब कुर्सी पर मौजूद हमारे मंत्री जॉर्ज फर्नाडीज सरकारी यात्रा पर अमेरिका गए थे तो उनके तो कपड़े तक उतरवा लिए गए थे। तब भी कोई नहीं बोला। और बोला अब भी कोई नहीं, वह तो मेहरबानी मीडिया की कि उसने इस घटना का पर्दाफाश किया। सरकार ने संसद में बवाल मचने पर कह दिया कि उसने कम्पनी को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस से क्या होगा? इस कंपनी को बोरिया-बिस्तर समेट कर जाने को कहना चाहिए।

इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली

सुरक्षा एजेंसियों पर लगाम लगे

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम की एयरपोर्ट पर आम नागरिक की तरह तलाशी लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। डॉ. कलाम किसी निजी यात्रा से विदेश जा रहे थे, लेकिन एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसी द्वारा जैसा व्यवहार उनके साथ किया गया वह दुखद है। डॉ.कलाम भारत के रत्न हैं ऐसे में उनकी तलाशी लेना गलत है। भारत सरकार को ऐसी हरकत करने वाली सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ऐसी हरकतों की पुनरावृत्ति न हो सके।

चन्द्रशेखर पैन्यूली, लिखवार गांव, टिहरी

चैंपियनों की कोई नहीं सुनता रे

कुछ बातें तो हमारे भारतवर्ष में संभव हो सकती हैं। हाल ही में पटियाला में पुरुषों के सेलेकशन ट्रायल के समय भारतीय मुक्केबाजी फेडरेशन के सचिव पी. के. मुरलीधरन और कई द्रोणाचार्य अवार्डी कोचों के सामने बॉक्सर रेनू के चाय-नाश्ता परोसने और जूठे बर्तन धोने का जोमामला प्रकाश में आया, उसकी गूंज संसद तक सुनाई दी। सन् 2006 में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद रेनू गोरा की रेलवे में नौकरी लगभग तय हो गई थी। परंतु मैंने जैसा कि पहले ही कहा कि कुछ बातें भारतवर्ष में ही संभव हैं तो संभवत: हुआ भी यही नियुक्ति पत्र का इंतजार करते-करते सन 2008 आ गया और इसकी दस्तक के साथ ही इस कांस्य पदक विजेता से कह दिया गया कि अब आपकी उम्र अधिक हो गई है इसलिए नौकरी आपको नहीं मिल सकती।

अनूप आकाश वर्मा,  नई दिल्ली

कसाब के खिलाफ कार्रवाई हो

मुम्बई बम धमाकों के मुख्य आरोपी जीवित पकड़े गए आतंकवादी अजमल आमिर कसाब ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। अब उसे जल्द से जल्द सजा देनी चाहिए। बेगुनाहों की मौत के जिम्मेदार इस आतंकी को भी मृत्युदण्ड देना चाहिए। कसाब का जुर्म कबूल करना भारत की जीत है। अब तो कम से कम पाकिस्तान को मुंबई धमाकों में शामिल अन्य सभी आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। 

मनमोहन रावत, नई दिल्ली

जनता परेशान, कानून महान

क्या हमारी न्यायिक प्रक्रिया में आमूल चूल परिवर्तन की जरूरत नहीं है। अंग्रेजी शासन में जो कायदे कानून बने थे और जो न्याय प्रणाली बनाई गई थी, वह अधिनायकवादी थी। स्वतंत्र भारत में वह बदलने की जरूरत थी। उसमें जो सुधार हो रहे हैं वे बहुत धीरे-धीरे हो रहे हैं। न्याय के नाम पर गरीब जनता का खूब शोषण होता है।  

मधु परमार, दिल्ली

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