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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल की पत्रकार पर हमला

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल की पत्रकार पर हमला

ऑस्ट्रेलिया में एक युवा भारतीय पत्रकार पर हमला किया गया जिसने उन आव्रजन और शिक्षा घोटालों पर एक कार्यक्रम तैयार किया है जिनके जरिए भारत से आने वालों सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के साथ धोखाधड़ी की जाती है।

एबीसी टीवी के साथ रिपोर्टर के रूप में काम करने वाली महिला को फोर कार्नर्स नाम के कार्यक्रम के निर्माण के दौरान धमकी दी गई तथा सप्ताहांत उस पर हमला किया गया।

एबीसी ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख में बताया है कि महिला पत्रकार ग्राहक के रूप में दो विभिन्न आव्रजन एजेंटों पास गई और उनसे योग्यता के बिना अंग्रेजी भाषा परीक्षा पास कराने की बात कही तथा उन्हें बताया कि वह फर्जी वर्क सर्टिफिकेट चाहती है।

एजेंटों ने उससे कहा कि तीन से पांच हजार अमेरिकी डॉलर में उसके दोनों काम हो जाएंगे। पत्रकार पर हमला ऑस्ट्रेलियाई शहरों में भारतीय छात्रों पर लगातार हो रहे नस्ली हमलों के परिप्रेक्ष्य में काफी मायने रखता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि हमले या धमकी के पीछे फोर कार्नर्स में दिखाए गए एजेंटों या कॉलेजों का हाथ है या फिर इसके लिए कोई और जिम्मेदार है।

यह कार्यक्रम सोमवार रात प्रसारित होगा जिसमें ऐसे कई मामलों का खुलासा किया जाएगा जब अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों को हजारों डॉलरों की चपत लगा दी गई।

एबीसी ने प्रबमीत सिंह की मां पुष्पिंदर कौर के हवाले से कहा है कि उनका परिवार काफी निराश है और उनके पुत्र को अभी तक पायलट का लाइसेंस नहीं मिला है। प्रबमीत उड्डयन के पाठयक्रम पर 40 हजार डालर खर्च कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि यह धोखाधड़ी है। हमें स्कूल के बारे में कई लुभावनी तस्वीरें दिखाई गईं और वास्तव में ऐसा नहीं है, यह सिर्फ एक घोटाला है। मेरा मानना है कि सरकार को ऐसे मामलों में ज्यादा सावधान होना चाहिए क्योंकि बच्चों का भविष्य दांव पर है।

कई भारतीय छात्रों ने टीवी चैनल से कहा कि उड्डयन कालेज एयरोस्पेस एविएशन 52 हफ्तों में दो सौ घंटे का उड़ान समय देने के वादे में असफल रहा। बहरहाल एयरोस्पेस एविएशन के प्रवक्ता सुई डेविस ने प्रशिक्षण का बचाव किया और छात्रों की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।

सिडनी के शिक्षा और प्रवासी एजेंट कार्ल कोनराड ने कहा कि वह काले बाजार में वर्षों से चल रहे फर्जी दस्तावेजों से अवगत हैं। उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी मेरे कार्यालय आते हैं और कहते हैं मैं एक निश्चित रेस्टोरेंट से तीन हजार डालर में दस्तावेजों को खरीद सकता हूं।

उन्होंने कहा कि वह रेस्टोरेंट का नाम नहीं बताते लेकिन मैं इस तरह की कई कहानियां जानता हूं। इसलिए हमने यह सूचना प्रवासी विभाग को भेज दी और उन्होंने धन्यवाद देते हुए कहा कि वह इसे ट्रेडस रिकाग्निशन आस्ट्रेलिया को भेज देंगे। अब तक कुछ नहीं हुआ।

एबीसी के प्रवक्ता ने कहा कि रिपोर्टर अब भी सुरक्षित और स्वस्थ है। प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। हमारा मानना है कि शिक्षा एजेंट या कार्यक्रम में चिन्हित कालेज मामले के पीछे नहीं हैं। रिपोर्टर भारतीय है और सुरक्षा कारणों से उसकी पहचान उजागर नहीं की गई है। यह पूछने पर कि क्या यह रंगभेद हमला है, प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

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