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क्या लेडयुक्त पेट्रोल ही बेहतर था

वॉशिंगटन की पैसिफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लैबोरटरी के डैन जिक्जो ने अनुमान व्यक्त किया है कि यदि हम लेडयुक्त पेट्रोल का उपयोग करें तो धरती थोड़ी कम गर्म होगी। यह अनुमान उन्होंने बादल बनने की क्रिया के अध्ययन के आधार पर लगाया है। इससे तो ऐसा लगता है कि अतीत में हम जो काम कर रहे थे (यानी पेट्रोल में लेड मिला रहे थे) वह कम से कम जलवायु की दृष्टि से तो बेहतर ही था।

प्रयोग

शुद्ध पानी का भाप धूल के कणों, पराग कणों और यहां तक कि बैक्टीरिया के आसपास भी अपेक्षाकृत अधिक तापमान पर बर्फ के रूप में जम जाती है। यदि ऐसे कण न हों, तो इसे बर्फ बनने के लिए और ठंडा करना पड़ेगा। कणों की उपस्थिति का फायदा यह होता है कि अपेक्षाकृत गर्म बादल बनते हैं जो धरती की ज्यादा गर्मी को अंतरिक्ष में बिखेर देते हैं। यदि वातावरण में ऐसे कण न हों तो बादल कम तापमान पर बनते हैं।

जिक्जो और उनके साथियों ने स्विटजरलैंड की हवा से ऐसे कण प्राप्त किए जिनकी मदद से उन्होंने कृत्रिम बादलों का निर्माण किया। उन्होंने पहले ही विश्लेषण किया था कि इनमें से मात्र 8 प्रतिशत कणों में लेड उपस्थित था। मगर जब बादलों का विश्लेषण करने पर देखा गया कि जिन कणों के आसपास बादल बने हैं उनमें 44 प्रतिशत में लेड है। शोधकर्ताओं के अनुसार लेड की उपस्थिति में धूल के कण ‘अति-आवेशित’ होते हैं, इसलिए बादल बनाने में ज्यादा सहायक होते हैं।

लेकिन..

जब पूरी दुनिया में पेट्रोल में से लेड हटा दिया गया, उससे पहले वायुमंडल में कहीं अधिक लेडयुक्त कण होते थे और ये गर्म बादल बनाकर धरती को ठंडा रखने में मददगार होते थे। ध्यान रखने वाली बात ये है कि लेड घातक होता है।

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