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देश की पहली परमाणु पनडुब्बी में एचइसी का भी योगदान

आकाश की ऊंचाइयों को चूमने के बाद एचइसी ने समुद्र की गहराई तक अपनी पहचान बना ली है। कई सेटेलाइट के प्रक्षेपण में अपना योगदान देनेवाले एचइसी ने देश की पहली परमाणु पनडुब्बी के निर्माण में योगदान दे साबित कर दिया है कि देश के लिए इसकी उपयोगिता कभी खत्म नहीं होगी। यही कारण है कि अरिहंत की लांचिंग की खबर मिलने के साथ ही यहां के अधिकारियों और इंजीनियरों के चेहरे खिल उठे हैं।

अरिहंत के निर्माण की योजना बनने के साथ ही एचइसी को भी इसके लिए एक महत्वपूर्ण टास्क दिया गया था। एटमी रियेक्टर के लिए कुछ खास उपकरण बनाना था। इस उपकरण को देने से दुनिया के कई देशों ने इनकार कर दिया था। देश के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी और एचइसी ने इस चुनौती को स्वीकार किया। इसके लिए एक विशेष स्टील विकसित करना था।

एचइसी ने प्रथम प्रयास में स्टील विकसित कर लिया। इसके बाद शुरू हुआ सबसे जटिलतम काम। स्टील की फोर्जिग आसान नहीं थी। फोर्जिग इतनी जटिल होती है कि वातावरण में थोड़े से बदलाव का असर इस पर पडम्ने लगता है। पहली बार फोर्जिग हुई, तो कुछ खामियां रह गयी थीं। लेकिन इंजीनियरों ने हार नहीं मानी।

दूसरी बार जब इसकी फोर्जिग की गई, तो एटमी विशेषज्ञ एवं नौसेना के अधिकारियों के चेहरे चमक उठे। जितना मापदंड चाहिए था, फोर्जिग उसी के अनुकूल रही। इसके बाद तीसरे चरण का काम किया गया। बाद में कुछ और उपकरणों का निर्माण किया गया। हर बार विशेषज्ञ आते, और इसकी जांच कर चले जाते थे। अंतत: एचइसी ने सफलता हासिल कर देश के लिए विदेशी मुद्रा बचाई।

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  • Web Title:आकाश के बाद समुद्र की गहराई तक पहुंचा एचइसी