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कारगिल के शहीदों को द्रास में दी गई श्रद्धांजलि

कारगिल के शहीदों को द्रास में दी गई श्रद्धांजलि

वर्ष 1999 में कारगिल की जंग में शहीद हुए देश के जवानों को सीमावर्ती द्रास कस्बे में सैनिकों और उनके पारिवारिक सदस्यों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

जहां एक ओर अधिकारियों, सैनिकों व कई शहीद जवानों के परिजनों ने रविवार तड़के युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र चढ़ा कर अपनी श्रद्धांजलि दी, वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने भी कारगिल जंग के शहीदों को सलाम किया।

नई दिल्ली में इंडिया गेट पर स्थित युद्ध स्मारक पर प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे देश के साथ अपने आप को शरीक करता हूं। उन्होंने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपनी जानें कुर्बान कर दी थी।

द्रास में यह एक भावुक क्षण था, जब परिजनों और भाइयों-बहनों ने उस चोटी का दौरा किया, जहां उनके अपने जिगर के टुकड़े ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए लड़ाई में अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

ज्ञात हो कि रणनीतिक महत्व के श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर कब्जे के इरादे से पाकिस्तानी सेना के सहयोग से भारी हथियारों से लैस घुसपैठिए नियंत्रण रेखा पार कर कारगिल, द्रास, बटालिक और टुरटोक सेक्टरों में घुस आए थे। घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए हुई जंग में 500 से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।

कारगिल युद्ध के दौरान रिपोर्टिग करने वाले और रविवार को समारोह में मौजूद पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने बताया कि घुसपैठिए राजमार्ग से 300 मीटर दूर तक आ गए थे।

वर्ष 1999 में ब्रिगेडियर रहे और द्रास सेक्टर से घुसपैठियों को पीछे धकेलने वाली माउंटेन ब्रिगेड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) अमरनाथ औल ने कहा कि यह ऐसा अनुभव है जिसे कोई भी सैनिक कभी नहीं भूल सकता। मैं अपने जवानों की अथक प्रतिबद्धता को सलाम करता हूं, जिन्होंने सभी कठिनाइयों का सामना किया और अपने देश की रक्षा के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी।

सेना से पिछले महीने अवकाश ग्रहण करने वाले औल ने माउंटेन ब्रिगेड के सभी बहादुर जवानों को याद किया, जो द्रास अभियान में शरीक हुए थे।

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