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विकास के पैसे को डकार गए अधिकारी और प्रधान

वजीरपुर गांव का विकास कार्य पिछले चार वर्षो से कागजों पर हो रहा है। इस दौरान कोई भी अधिकारी गांव में जाने की जहमत नहीं उठाई। विकास कार्यो से जुड़े

अधिकारी भी प्रधान द्वारा प्रस्तुत रजिस्टर में विकास कार्यों को देखकर संतुष्ट होते रहे। अधिकारियों के इस लापरवाही के कारण ग्राम प्रधान शासन द्वारा जारी

लाखों रुपए का विकास फंड को डकार गए और किसी अधिकारी को इसकी भनक तक नही लगी। चार वर्ष बाद आला अधिकारियों को जब गांव के विकास कार्यों

की सुधा आई तो कार्यों की समीक्षा की गई, जिसमें दोषी पाए जाने पर कई गांवों के प्रधानों को नोटिस व कई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया गया है।
पिछले दिनों शासन के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में अबतक हुए विकास कार्यो की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान अधिकारियों को पता चला कि वजीरपुर गांव में

नालियों की सफाई के लिए वर्ष 2005-06 में 25,114 रुपए शासन ने दिए थे। शासन द्वारा जारी बजट खत्म भी हो गया, लेकिन किन मदों में हुआ, इसका

कोई हिसाब ग्राम प्रधान के पास नहीं है। ग्राम प्रधान ने सात हजार रुपए स्टेशनरी पर खर्च दिखाया है, लेकिन इसका भी हिसाब उसके पास नहीं है। गांव के

प्रधान ने वर्ष 2007-08 में पौधा रोपण के लिए कुल 9 हजार रुपए खर्च किए और कागजों पर 19,400 दिखा दिया। गांव के साफ सफाई पर प्रधान ने

अधिकारियों के अनुमति के बिना ही 21 हजार रुपए खर्च कर डाले। ग्राम प्रधान के पास साफ-सफाई का भी कोई हिसाब नहीं है।
जिला विकास अधिकारी मदन वर्मा के अनुसार गांवों के विकास के नाम पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले कई ग्राम प्रधानों के खिलाफ नोटिस भेजा गया

है। इसके अलावा गांवों के दो प्रधानों के खिलाफ अलग अलग कोतवालियों में एफआईआर दर्ज कराया गया है। एक ग्राम प्रधान के दोषी पाए जाने पर वित्तीय

अधिकार रोक दिया गया है।

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  • Web Title:कागजों पर होता रहा गांव का विकास कार्य