DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

‘जजों द्वारा संपत्ति का गलत ब्यौरा देना कदाचार’

‘जजों द्वारा संपत्ति का गलत ब्यौरा देना कदाचार’

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने कहा है कि प्रस्तावित न्यायाधीश संपत्ति विधेयक में संपत्ति की घोषणा नहीं करने या गलत विवरण की घोषणा को कदाचार की श्रेणी में रखा जाएगा और यह उन्हें हटाने का आधार हो सकता है।

न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने यहां कहा कि न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पहले से ही अपनी संपत्ति घोषित करते रहे हैं लेकिन अब उन्हें अपने आश्रितों की संपत्ति का ब्यौरा भी देना होगा।

इस सवाल पर कि क्या संपत्ति के इस ब्यौरे को सार्वजनिक किया जाएगा तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह ब्यौरा सूचना के अधिकार के प्रावधानों में नहीं आएगा। लेकिन प्रस्तावित विधेयक के तहत न्यायाधीशों को अपनी संपत्तियों की घोषणा मुख्य न्यायाधीश के समक्ष करनी होगी।

अग्रिम जमानत पर सुनवाई के मामले में मद्रास हाई कार्ट के न्यायाधीश आर रघुपति की टिप्पणी पर हुए विवाद पर न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि मीडिया में इस तरह की रिपोर्ट थी कि एक मंत्री ने इस मामले में उक्त न्यायाधीश से संपर्क किया था। इसके बाद मुझे पता चला कि किसी भी मंत्री ने उस न्यायाधीश से बातचीत नहीं की थी और इस मामले में मुझे यही जानकारी हैं।

इस वर्ष फरवरी में वकीलों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद मद्रास हाई कोर्ट परिसर में सुरक्षा इंतजामों पर उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक स्थान के तौर पर अदालत परिसर को किले की तरह नहीं दिखना चाहिए।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:‘जजों द्वारा संपत्ति का गलत ब्यौरा देना कदाचार’