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एयर इंडिया की धन की मांग पर मंत्रालय अप्रसन्न

एयर इंडिया की धन की मांग पर मंत्रालय अप्रसन्न

नागरिक उड्ययन मंत्रालय ने भारी घाटे में चल रहे एयर इंडिया द्वारा संकट से उबरने के लिए बीस हजार करोड़ रूपए मांगे जाने पर अप्रसन्नता जाहिर की है और उसका मानना है कि अगर इतनी रकम दे भी दी जाए तो भी वह वर्ष 2022 तक मुनाफा नही कमा सकती है।

नागरिक उड्ययन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एयर इंडिया ने अपने खर्च को कम करने के बारे में कोई व्यवहारिक प्रस्ताव नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट सविव की अध्यक्षता में गठित समिति ने खर्च कम करने के लिए एयर इंडिया को उत्पादकता से जुडे़ लाभ की व्यवस्था को खत्म कर अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की भांति एक वैकल्पिक योजाना बनाने को कहा है।

अधिकारी ने बताया कि एयर इंडिया की आय और व्यय में दोगुना से ज्यादा फर्क है। उसका महीने का खर्च 1750 करोड रूपए है और उसकी आय महज 950 करोड़ रूपए है। इसका सीधा गणित यह है कि एयरलाइन को हर महीने 800 करोड़ रूपए का घाटा हो रहा है। दरअसल उसने जो मदद मांगी है अगर वह उसे दे भी दी जाए तो वह वर्ष 2022 तक मुनाफा नही कमा सकता है।

अधिकारी ने बताया कि एयर इंडिया का घाटा 2008-09 में पांच हजार करोड़ रूपए से ज्यादा रहने का अनुमान है और उसे अगले छह महीने के लिए अपने मौजूदा भुगतान को ही पूरा करने के लिए ही पांच हजार करोड़ रूपए की जरूरत पड़ेगी। फिर उसने जो प्रस्ताव रखे हैं उसके अनुसार कुल मिलाकर संकट से पूरी तरह उबरने के लिए बीस हजार करोड़ रूपए की मांग की गई है जिसे सरकार के लिए पूरा कर पाना टेढी खीर साबित होगा।

अधिकारी ने कहा कि अगर एयर इंडिया को इतनी बडी राशि दे भी दी गई तो घाटे में चल रहे बाकी सार्वजनिक उपक्रमों से एयर इंडिया के अनुपात में राहत की मांग उठने लगेगी। फिर सरकार के लिए उन्हें मना कर पाना मुश्किल हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि नागरिक उड्ययन मंत्री प्रफुल्ल पटेल जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास एयर इंडिया को मदद देने गुहार लगाने गए थे तो उन्होंने उसकी मांग जानने पर नाखुशी जाहिर की थी और यहां तक कहा था कि संकट से उबारने में मदद देने का यह मायने नही है सरकार एयर इंडिया को ब्लैंक चेक देने जा रही है।

अधिकारी ने बताया कि एयर इंडिया अपने खर्च में कटौती, लीज पर लिए गए विमानों के उपयोग के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाई। यही वजह है कि विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों की समिति ने वित्त मंत्रालय से एयर इंडिया के प्रस्तावों की कड़ाई से समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।

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