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राजद नेताओं-कार्यकर्ताओं पर है पार्टी की खुफिया नजर!

राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पार्टी की खुफिया नजर है! पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में ‘दौड़ने वाले घोड़े ’ की तलाश में है, जबकि ‘अनफिट’ लोगों को हासिये पर धकेलने की भी पूरी तैयारी है। पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद इस गोपनीय अभियान की कमान खुद संभाले हुए हैं। कई सिपहसलार इस काम में उनकी मदद में जुटे हैं।

कार्यकर्ता यह भले समझे कि सत्ता की उलझनों से फारिग होने के बाद श्री प्रसाद सिर्फ संघर्ष की रणनीति बना रहे हैं। लेकिन सच यह है कि वे जिला से लेकर राज्यस्तर तक के नेताओं की ‘जन्मकुंडली’ भी खंगाल रहे हैं। उद्देश्य है वैसे लोगों की पहचान करना जो अगले विधानसभा चुनाव में ‘काम का आदमी’ साबित हो।

लोकसभा चुनाव में मात खाने के बाद राजद विधानसभा चुनाव में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। पार्टी संगठन में व्यापक फेरबदल की तैयारी के साथ विधानसभा के लिए जिताऊ उमीदवारों की तलाश भी अभी से शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों पर भरोसा करें तो सबकुछ इतने गोपनीय ढंग से चल रहा है कि कई वरीय नेताओं को भी इसकी जानकरी नहीं मिल पाती। नेता प्रमंडलीय सम्मेलनों और पार्टी के कार्यक्रमों में अपनी ताकत दिखाने में जुटे रहते हैं और उनकी असलियत नेता के पास पहले ही पहुंच जा रही है। 

इसके लिए जिन नेताओं को जिलों में भेजा जा रहा है वे पर्यवेक्षक बनकर तामझाम के साथ नहीं बल्कि आम कार्यकर्ता की तरह जाते हैं। वहां न कोई बैठक होती है न किसी से मशविरा। बस अपने ढंग से पार्टी की गतिविधियों का अध्ययन किया और लौटकर रिपोर्ट सौंप दी। मीडिया से भी दूर रहने की सलाह उन्हें पहले ही दे दी जाती है। इन रिपोटों की क्रास चेकिंग की भी व्यवस्था है।

जानकारी के अनुसार नालंदा, नवादा, मुंगेर, दरभंगा, किशनगंज, खगडि़या, बेगूसराय और बक्सर जिलों से रिपोर्ट मुख्यालय पहुंच चुकी है। इस बावत पूछने पर प्रधान महासचिव रामकृपाल यादव सिर्फ इतना ही कह पाते हैं कि संगठन में फेरबदल तो होना ही है। पार्टी अध्यक्ष ने इसकी घोषणा पहले ही कर दी है।
 

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