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घटिया अनाज से खाद्यान्न सुरक्षा पर सवाल

घटिया किस्म के अनाज ने गरीबों को खाद्यान्न सुरक्षा देने की मुहिम पर सवाल खड़ा कर दिया है। अंत्योदय और बीपीएल योजना के तहत एक दर्जन से अधिक जिलों में उठाव बाधित है। अब जाकर सरकार ने भारतीय खाद्य निगम को शिकायत वाले जिलों में बेहतर किस्म का अनाज उपलब्ध कराने का फरमान जारी किया है।

सात जिलों में अन्त्योदय योजना जबकि छह जिलों में बीपीएल योजना के अनाज का उठाव शून्य रहा है। जमुई और मुजफ्फरपुर समेत छह जिलों में पीले रंग के चावल की आपूर्ति कर दी गयी है। इससे पहले आरा और बक्सर में घटिया किस्म का गेहूं भेजा गया था जिसकी शिकायत मिलने पर एफसीआई ने उसे वापस कर लिया। 

सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी और किशनगंज में बीपीएल परिवारों के संख्या 22 लाख से भी अधिक है। फिर भी वहां अनाज का उठाव नगण्य रहा है। इसी प्रकार सीतामढ़ी, शिवहर, अररिया, मधुबनी, किशनगंज, लखीसराय और शेखपुरा में अन्त्योदय योजना के तहत मिले गेहूं और चावल का उठाव शून्य रहा है। पता चला कि एफसीआई के गोदामों में खराब गुणवत्ता का अनाज रहने की वजह से जन वितरण दुकानदार आवंटन की तुलना में अनाज का कम उठाव कर रहे हैं।

इसका खामियाजा आखिरकार गरीब जनता को भुगतान पड़ रहा है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने शुक्रवार को ही एफसीआई के महाप्रबंधक को छह जिलों के गोदामों में पड़ाव घटिया चावल हटाने को कहा है। साथ ही जिलों को भी एफसीआई के गोदाम से निम्न गुणवत्ता वाले अनाज का उठाव नहीं करने की हिदायत दी गयी है।

वैसे एफसीआई ने कई गोदामों में अनाज को चलवा कर साफ कराना शुरू भी कर दिया है। वैसे राज्य में घटिया किस्म के अनाज की आपूर्ति का मामला नया नहीं है। फुलवारीशरीफ स्थित एफसीआई के डिपो में केन्द्रीय मंत्री ने औचक निरीक्षण के दौरान 314.5 टन ऐसा अनाज पकडम जो आदमी के खाने लायक नहीं था।

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