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ब्रासा के सामने भारतीय हाकी के पुनरोद्धार की चुनौती

ब्रासा के सामने भारतीय हाकी के पुनरोद्धार की चुनौती

ओलंपिक के लिए 1928 के बाद पहली बार क्वालीफाई करने में विफल रहने के बाद भारतीय पुरुष हाकी टीम की नजरें नए कोच स्पेन के जोस ब्रासा की अगुआई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेरने पर टिकी है।

देश के राष्ट्रीय खेल के पुनरोद्धार का पहला मौका चार देशों का यूरोपीय दौरा है जिसके लिए टीम नए प्रभारी कोच ब्रासा के मार्गनिर्देशन में निकल चुकी है। वर्ष 1980 तक आठ ओलंपिक स्वर्ण जीतने के देश के गौरवशाली इतिहास को भूलने की ब्रासा की सलाह पर पूर्व दिग्गजों ने नाराजगी भी जताई थी।

अपने से बेहतर रैंकिंग वाली इंग्लैंड, बेल्जियम, स्पेन और हालैंड की टीमों से 12 मैच खेलने के लिए यूरोप दौरे पर रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि भारतीय टीम इतिहास में जी रही है। मेरा लक्ष्य है कि बेहतर नतीजे हासिल करने के लिए वे अपना खेलने का तरीका बदलें।

पिछले साल टीम के बीजिंग ओलंपिक के लिए भारतीय टीम के क्वालीफाई करने में नाकाम रहने के बाद ब्रासा को भारतीय हाकी के पुनरोद्धार के लिए टीम के साथ जोड़ा गया है।

भारतीय टीम आज शीर्ष 10 टीमों में भी शामिल नहीं है और इस पतन की शुरुआत रातों रात नहीं हुई और इसकी नींव 1976 में कृत्रिम टर्फ की शुरुआत से पहले ही रख दी गई लेकिन 1975 में कुआलालम्पुर में विश्व कप जीत के बाद भारतीय अधिकारियों ने सचाई के प्रति नजरें फेर ली जबकि पश्चिमी देशों ने प्रगति जारी रखी। मास्को 1980 ओलंपिक खेलों में टीमों के बहिष्कार के कारण भारत ने स्वर्ण जीता लेकिन 1986 में विलेसडन वर्ल्ड कप में टीम 12वें स्थान पर रही।

इसके बाद से भारतीय टीम को एक के बार एक निराशा झेलनी पड़ी और हर बार एक नया बहाना बनाया गया। धनराज पिल्ले की अगुआई में 1998 में भारत ने बैंकाक एशियाई खेलों का 22 साल बाद स्वर्ण पदक जीता। महासंघ की बेरूखी और टीम के खराब प्रदर्शन के बावजूद केपीएस गिल के अध्यक्ष और ज्योतिकुमारन के सचिव बने रहने से लोगों के बीच गलत संदेश गया।

चिली में 2008 की शुरुआत में टीम ब्रिटेन को पछाड़कर बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में विफल रही जिससे ताबूत में अंतिम कील का काम किया।
इसके बाद स्टिंग आपरेशन में केपीएस गिल और के ज्योतिकुमारन से हाकी का संचालन छीन लिया गया और भारतीय ओलंपिक संघ ने खेल को चलाने के लिए तदर्थ इकाई का गठन किया।

अंतरराष्ट्रीय हाकी संघ ने इसके बाद अगले साल होने वाले वर्ल्ड कप के मेजबानी अधिकार छीनने और टीम को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलने से रोकने की धमकी दी जिसके बाद पुरुष और महिलाओं के लिए एक संयुक्त इकाई हाकी इंडिया का गठन किया गया।

हालांकि इन सबके बीच सबसे बड़ी चुनौती ओलंपिक, वर्ल्ड कप, एशियाई खेलों और चैम्पियन्स ट्राफी जैसी हाकी की बड़ी प्रतियोगिताओं में भारत को जीत की राह पर लौटना है जो आसान नहीं होगा।

भारत के लिए 2010 काफी अहम वर्ष होगा जब मार्च में वर्ल्ड कप के बाद अक्तूबर में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया जाएगा और फिर इसके बाद चीन के गुआंगक्षू में एशिया कप भी होगा। अब सबकी नजरें भारत को जीत की राह पर लौटाने के लिए ब्रासा पर टिकी हैं।

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  • Web Title:ब्रासा के सामने भारतीय हाकी के पुनरोद्धार की चुनौती