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राजरंग

ोई परदेशी आकर..कोई परदेशी आकर टिकट ले गया .. आते..आते हम सबको झटका दे गया। इ गाना अभी बहुत पोपुलर हो गया है। जिसको देखिये गुनगुनाये जा रहा है। सही में गीत गाने का सिचुएशन बना हुआ है हिंया। झारखंड स्टेट का इ बैड लक है कि हिंया परदेशी लोग आकर चुनाव लड़ते हैं। गांव-गिराम के लोग फहुवा के रह जाते हैं। अब इन्ही का लीजिये। लालटेन छाप के एगो सीनियर नेता जी बड़ी दिन से मन में जोहले थे कि इ बार इलेक्शन लड़बे करंगे। सभे कोई उनके संगे-संग दिल्ली से पटना तक गये। सलाह-मशविरा किये। सब कुछ ठीके-ठाक चल रहा था कि एलेवेंथ आवर में काम गड़बड़ा गया। पता नय कौन बीच में भांजी मार दिया कि नेताजी का मन खट्टा करके रख दिया। गिरि- पर्वत, झाड़-झंखाड़ इलाके में रहनेवाले नेताजी सोचे थे कि लालटेन का उाियारा इ बार सगरो फैलावेंगे। लेकिन सब किये धर पर पानी फेर दिया लोग। इ अच्छा नय हुआ, एकदम अच्छा नय हुआ। लालटेन में तेल-बाती आखिर हिंया के लोग ही न देता है, कौनो परदेशी लोग थोड़े ना देता है। देखिये आगे का होनेवाला है? लालटेन की बाती बुझती या जलती है . .।

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