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आईपीएल के बाद कई क्रिकेटरों का हुआ टेस्ट से मोहभंग

आईपीएल के बाद कई क्रिकेटरों का हुआ टेस्ट से मोहभंग

कम समय में अधिक पैसा कमाने के साधन के रूप में क्रिकेटरों में लोकप्रिय बने टवेंटी 20 क्रिकेट को भले ही आईसीसी टेस्ट क्रिकेट के लिए खतरा नहीं मानती हो लेकिन वास्तविकता यही है कि खेल के इस छोटे प्रारूप में कैरियर लंबा खींचने के लिए कई दिग्गज खिलाड़ियों ने टेस्ट मैचों से विदाई लेने में देर नहीं लगाई।

मैथ्यू हेडन, एडम गिलक्रिस्ट, सनथ जयसूर्या, स्टीफन फ्लेमिंग, सौरव गांगुली, अनिल कुंबले से लेकर अब एंड्रयू फ्लिंटॉफ और चामिंडा वास उन चोटी के 12 खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने विशेषकर इंडियन प्रीमियर लीग के अस्तित्व में आने के बाद टेस्ट क्रिकेट से नाता तोड़ा।

फ्लिंटॉफ और वास इस श्रेणी में जुड़ने वाले नए खिलाड़ी हैं जिससे यह बहस शुरू हो गई है कि क्या आईपीएल को पूरा समय देने के लिए क्रिकेटर ऐसा कदम उठा रहे हैं। वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान और आईसीसी क्रिकेट समिति के अध्यक्ष क्लाइव लायड ने तो इसे बहुत गंभीर मसला करार दिया है।

लायड ने कहा कि अगर टवेंटी 20 नहीं होता तो क्या इनमें से कुछ खिलाड़ी संन्यास लेते। इसमें कोई शक नहीं कि अगर मुझे 15 लाख डालर दिए जाएंगेऔर मुझे ज्यादा काम भी नहीं करना होगा तो निश्चित रूप से मैं इसके लिए तैयार रहूंगा। उन्होंने फ्लिंटॉफ के टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के फैसले को निराशाजनक करार दिया और चिंता जताई कि अन्य खिलाड़ी भी उनकी राह पर चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर अपने कैरियर के अंत में संन्यास लें तो उन्हें ज्यादा खुशी होगी।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने 13 सितंबर 2007 को दिल्ली के लिए पंचतारा होटल में आईपीएल की घोषणा की थी जिसके बाद कई खिलाड़ियों ने टेस्ट क्रिकेटसे तो नाता तोड़ दिया लेकिन खुद को आईपीएल में बनाए रखा। इनमें गिलक्रिस्ट और हेडन भी शामिल हैं जिनकी आस्ट्रेलिया को आज भी कमी खल रही है। गिलक्रिस्ट ने आईपीएल को छोड़कर सभी तरह की क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कहा था कि उनका यह फैसला इस लीग से प्रभावित नहीं है, लेकिन उन्होंने इस धनाढय लीग के शुरू होने से कुछ महीने पहले जनवरी 2008 में टेस्ट क्रिकेट से विदाई ली थी। पिछले दो वर्ष से वह आईपीएल में धूम मचा रहे हैं और इसमें 30 मैच में कुल 931 रन दर्ज हैं। उनकी अगुवाई में डेक्कन चार्जर्स ने 2009 का खिताब भी जीता।

हेडन राष्ट्रीय टीम में प्रतिबद्धताओं के कारण पहले आईपीएल में केवल चार मैच खेल पाए थे लेकिन इसके बाद उन्होंने इस साल जनवरी में संन्यास ले लिया और पूरी तरह से आईपीएल को समर्पित हो गए। चेन्नई सुपर किंग्स के इस बल्लेबाज ने दक्षिण अफ्रीका में खेले गए टूर्नामेंट में सर्वाधिक 572 रन बनाए।

न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान फ्लेमिंग का फैसला तो पूरी तरह से आईपीएल से प्रभावित रहा। उन्होंने आईपीएल के पहले टूर्नामेंट से चंद सप्ताह पहले मार्च 2008 में संन्यास लेकर चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़ गए। वह उन खिलाड़ियों में शामिल थे जो आईपीएल की घोषणा के दौरान प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित थे।
न्यूजीलैंड के ही स्काट स्टायरिस ने भी फरवरी 2008 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था और अब वह वनडे और टवेंटी 20 में ही खेलते हैं। वैसे इन दोनों छोटे प्रारूपों में ही खेलने का चलन श्रीलंकाई जयसूर्या ने शुरू किया था जिन्होंने दिसंबर 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। अब फ्लिंटॉफ और वास भी इस कड़ी में जुड़ गए हैं जो आगे वनडे और टवेंटी 20 में तो खेलते हुए दिखेंगे लेकिन टेस्ट मैचों में नहीं।

पूर्व भारतीय कप्तान गांगुली और कुंबले ने भी पिछले साल आस्ट्रेलियाई सीरीज के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई ली लेकिन वह अब भी आईपीएल केअहम अंग हैं। कुंबले ने तो इस वर्ष आईपीएल में 21 विकेट लिए थे। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान शान पोलाक ने भी इस लीग के शुरू होने से ठीक पहलेजनवरी 2008 में वेस्टइंडीज के खिलाफ डरबन में अपना अंतिम टेस्ट मैच खेला था।

आस्ट्रेलिया के शेन वार्न और ग्लेन मैक्ग्रा ने आईपीएल के अस्तित्व में आने से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था लेकिन वह अभी इस टवेंटी20 टूर्नामेंट से जुड़े हैं। आस्ट्रेलिया उनकी भरपायी करने में अब भी असफल रहा है। आईपीएल से पहले इंडियन क्रिकेट लीग से मिल रही मोटी रकम के कारण क्रिस हैरिस, नाथन एस्टल, क्रेग मैकमिलन, डेमियन मार्टिन, माइकल कास्प्रोविच आदि ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

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