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नरेगा बुन्देलखण्ड के लिए वरदान साबित

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना(नरेगा) सूखा प्रभावित बुन्देलखण्ड के लिए बरदान साबित हुई है। बुन्देलखण्ड के झांसी मण्डल में वर्ष 2008-09 में प्रभावी ढंग से नरेगा लागू किए जाने तथा उसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के कारण मजदूर वर्ग इस वर्ष रोजी-रोटी के लिए उतना परेशान नहीं है जितना गत चार सालों में लगातार पड़े सूखे के कारण परेशान था। मजदूर वर्ग में यह खुशहाली इस वर्ष नरेगा में 100 दिन का शत प्रतिशत रोजगार मिलने के कारण आई है इसी कारण इस वर्ष मजदूरों का उतना पलायन भी नहीं हुआ है।

इस आशय की जानकारी देते हुए मण्डलायुक्त टी पी पाठक ने बताया कि पहली अप्रैल 2008 से राष्ट्रीय स्तर पर लागू नरेगा योजना को जहां झांसी मण्डल में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है वहीं नरेगा का प्रभावी प्रचार-प्रसार भी किया गया है जिससे गांव के लाभार्थियों] मजदूरों, खेतिहर मजदूरों को योजना की भलि भंति जानकारी पहले से हो चुकी थी तभी वे अधिक से अधिक रोजगार पाने में सफल हो सके हैं।

उन्होंने बताया कि झांसी मण्डल में नरेगा को प्रभावी ढंग से प्रचार करने तथा सजगता पूर्वक लागू किए जाने के कारण ही जालौन के जिलाधिकारी रिग्जियान सैम्फिल को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। इसी प्रकार सतत शिक्षा प्रौढ़ साक्षरता अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने के लिए झांसी के जिलाधिकारी एम देवराज को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

पाठक ने बताया कि झांसी मण्डल में मार्च 2008 तक 3 लाख 56 हजार 21 परिवारों ने नरेगा योजना में रोजगार के लिए पंजीकरण कराया था जिनमें शतप्रतिशत परिवारों को जाबकार्ड उपलब्ध करा दिए गए थे तथा पंजिकृत परिवारों में 2 जाख 6 हजार 603 परिवारों को उनकी मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया गया है जिनमें 54 हजार 31 परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करया गया है।

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