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ऐतिहासिक क्षण, नौसेना परमाणु पनडुब्बी से लैस

ऐतिहासिक क्षण, नौसेना परमाणु पनडुब्बी से लैस

देश में बनी पहली परमाणु पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिहंत’ पर पड़ा गोपनीयता का आवरण रविवार को हट गया। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर विशाखापत्तनम स्थित अति गोपनीय ड्राई डॉक में अरिहंत का जलावतरण किया। भारत से परंपरागत रूप से बैर रखने वाले दो पड़ोसी देश-चीन और पाकिस्तान परमाणु ताकत रखते हैं।

पाकिस्तान की नीति है कि जरूरत पड़ने पर वह पहले परमाणु हथियारों का प्रयोग करेगा। चीन और भारत की नीति सेकेंड स्ट्राइक की है। भारत की सेकेंड स्ट्राइक की नीति के लिए परमाणु मिसाइलों से लैस एक परमाणु पनडुब्बी की अत्यंत जरूरत थी। यदि भारत के पास ऐसी पनडुब्बी नहीं होती, तो सेकेंड स्ट्राइक की क्षमता पर सवालिया निशान लगा रहता।

इसका कारण यह है कि जवाबी कार्रवाई के लिए विमानों और मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। ये हथियार जमीन या आसमान पर होते हैं और दुश्मन उपग्रह के जरिए उनका पता लगा कर पहले परमाणु हमले में ही नष्ट कर सकता है। परमाणु पनडुब्बी न्यूक्लियर ईंधन से चलती है।

पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी की तरह इंजन के लिए ऑक्सिजन लेने के लिए इसे सतह तक आने और खतरे में पड़ने की जरूरत नहीं होती।  परमाणु पनडुब्बी को चलाने के लिए परमाणु रिएक्टर में एक बार भरी गईं संंवर्धित यूरेनियम की छड़ें कई साल तक ऊर्जा पैदा करते हुए भाप बनाती है। इस भाप की मदद से पनडुब्बी चलती है।

यह एक बार डुबकी लगा कर छह महीने तक पानी के नीचे रह सकती है। यदि पाकिस्तान जैसा देश भारत पर परमाणु हमला कर दे तो जवाबी कार्रवाई के लिए यह पनडुब्बी सात सौ कि.मी. दूरी से जवाबी परमाणु मिसाइल छोड़ सकती है। यदि जरूरत पड़े तो यह कराची की नाक के नीचे पहुंच कर भी पाकिस्तान को तबाह कर सकती है। अरिहंत पनडुब्बी में एक साथ 12 के-15 परमाणु मिसाइलें लगी हैं। इसके अलावा कई टारपिडो भी हैं। अब पाकिस्तान को यदि आत्महत्या ही करनी हो तभी वह भारत पर एटमी हमले की जुर्रत करेगा। रही चीन से खतरे की बात, तो भारत ऐसी दो और पनडुब्बियां बना रहा है। मिसाइलों की मारक क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।


अब कैसा होगा पनडुब्बी बेड़ा

आईएनएस अरिहंत : नौसेना की ताकत का तीसरा आयाम। पहला सी हैरियर फाइटर विमान, दूसरा जंगी पोत और तीसरा और सबसे खतरनाक आयाम परमाणु व डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का बेड़ा।

आईएनएस चक्र : रूस से पट्टे पर इसी साल अकूला क्लास की एक परमाणु पन¸डुब्बी पट्टे पर मिलेगी। अभी इसमें परमाणु मिसाइलें नहीं होंगी। इसे आईएनएस चक्र नाम दिया जाएगा। भारत ने 1988 में इसी नाम से एक परमाणु पनडुब्बी कुछ साल के लिए रूस से पट्टे पर ली थी।

अन्य दो स्वदेशी परमाणु पनडुब्बियां : भारत अरिहंत क्लास की दो और पनडुब्बियां बना रहा है। इनकी क्षमता अरिहंत से ज्यादा होगी। इन पनडुब्बियों का जलावतरण भी 2011 तक होने की उम्मीद है। हजिरा, गुजरात में इन पनडुब्बियों के ढांचे तैयार हैं। अरिहंत का जलावतरण होते ही इन्हें भी विशाखापत्तनम लाया जाएगा।

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