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प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री ने बढ़ाई अथॉरिटी की उलझन

पांच साल पहले जरी हुआ नोएडा अथॉरिटी का फरमान बेमाने साबित हुआ। अथॉरिटी के रोक लगाने के बावजूद किसान से जमीन की सीधे तौर पर खरीद-फरोख्त कर रजिस्ट्री जारी है। रजिस्ट्री विभाग ने यह कहते हुए अपना हाथ खींच लिया कि उत्तर प्रदेश स्टांप ऐक्ट में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। इस वजह से रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती।


नोएडा के आसपास की ज्यादातर जमीन नोएडा की अधिसूचना क्षेत्र है। अथॉरिटी ने वर्ष 2004 में डीएम संतोष यादव को पत्र भेजकर सीधे किसान या किसी अन्य व्यक्ति से गांव के आसपास जमीन की खरीद और रजिस्ट्री पर रोक लगाने की बात कही गई थी। दरअसल रजिस्ट्री होने पर प्रॉपर्टी का लीगल दस्तावेज प्रॉपर्टी खरीदने वालों के पास हो जाता है। इससे वहां की जमीन अधिग्रहित करने में दिक्कत बढ़ जाती है। सैकड़ों बीघा जमीन इस वजह से अटकी पड़ी हुई है। डीएम ने उस समय रजिस्ट्री विभाग को भी निर्देशित कर दिया, लेकिन इस पर अमल अब तक नहीं किया गया। इसकी वजह कानूनी अड़चन है।


रजिस्ट्री विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्टांप ऐक्ट में रजिस्ट्री पर रोक लगाने जैसा कोई प्रावधान नहीं है। प्रॉपर्टी की दस्तावेज के साथ रजिस्ट्री की छूट है। ऐसे में सिर्फ अथॉरिटी के प्रस्ताव के आधार पर रोक नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए स्टांप ऐक्ट में प्रावधान होना चाहिए। उपायुक्त स्टांप वी डी शर्मा ने माना कि अथारिटी ने प्रस्ताव भेजा था, लेकिन ऐक्ट में प्रावधान या शासनादेश न होने के कारण रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाया जा सकता। दोनों विभागों में आपसी तालमेल के अभाव का खामियाज किसानों से जमीन खरीदने वालों को तब भुगतना पड़ता है, जब अथॉरिटी उनकी जमीन अधिग्रहित कर लेती है।

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