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छात्रों के साथ धोखा, सीएमएस मैनेजमेंट फरार

तीन महीने में कंप्यूटर कोर्स कराकर नौकरी दिलाने के नाम पर छात्रों के साथ खिलवाड़ करने वाले इंस्टीटयूट सीएमएस का मैनेजमेंट फरार हो गया है।

थाना कविनगर प्रभारी अनिल कपरवान ने इंस्टीटयूट पर डेरा डाल दिया है। छात्रों की तहरीर पर मैनेजमेंट के चार सदस्यों पर दफा 420 के तहत मुकदमा करने की तैयारी की जा रही है। आरडीसी स्थित सीएमएस कंप्यूटर इंस्टीटयूट में कई जिलों के छात्रों ने एडमिशन लिया। तीन माह की फीस 46 हजार रुपये वसूली गई व तीन महीने के बाद सर्टिफिकेट देकर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिलाया गया। दिसंबर 2008 में एडमिशन लेने के बाद जुलाई तक छात्रों का कोर्स तक पूरा नहीं कराया गया। साथ ही छात्रों से कह दिया गया कि 30 जुलाई तक गाजियबाद सेंटर बंद कर दिया जाएगा। जो छात्र दिल्ली स्थित में शिफ्ट होना चाहते हैं वह वहां जा सकते हैं। छात्रों को उसकी फीस रिफंड नहीं की जाएगी। मामले को लेकर छात्रों ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई। डीएम के आदेश पर मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट के हवाले से थाना कविनगर को सौप दी गई।

सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मिश्रा के आदेश पर सीएमएस मैनेजमेंट के चार सदस्य अनुराग सक्सेना, मनोज बंसल, रविदत्त व एलसीआर हेड अपर्णा टंडन के खिलाफ एफआरईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कविनगर थाना प्रभारी सुबह इंस्टीयटूट पहुंचे तो मैनेंजमेंट वहां से फरार हो गया। उन्होंने तुरंत सीएमएस के नेशनल हेड सुधीर भाष्कर से फोन पर वार्ता करके छात्रों की समस्या का समाधान करने के लिए कहा है।


उधर इस मामले में सीएमएस की एनसीआर हेड अपर्णा टंडन का कहना है कि सेंटर प्रोफिट न होने के कारण बंद करना पड़ रहा है। यहां कोर्स कर रहे छात्रों को संस्था के दूसरे सेंटरों पर शिफ्ट कराया जा रहा है। जो छात्र अपना पैसा वापस चाहते हैं उन्हे बकाया कोर्स का पैसा वापस दिया जएगा। वहीं छात्रों का कहना है कि तीन माह का कोर्स छह माह में भी पूरी नहीं हो पाया है नौकरी दिलाने की तो बात ही दूर। जितना कोर्स पूरा हो चुका है जब उसका कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया जा रहा तो संस्थान पैसा किस बात का काट रहा है। उन्होंने साफ कहा है कि उन्हे उनकी पूरी फीस वापस चाहिए।

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