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पूर्वोत्तर के बिजलीघरों में संकट गहराया

 कोयले पर कोहराम मचा है। देश के पूर्वात्तर हिस्सों के बिजलीघरों में कोयले के लिए हाहाकार है। इसका सीधा असर बिहार पर पड़ने लगा है। कोयले की कमी के कारण इन बिजलीघरों में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो गया है और उसमें 30 से 40 फीसदी तक की कमी आई है। इस वजह से बिहार के केन्द्रीय कोटे के तहत आवंटित बिजली में काफी कमी हो गई है और बिहार बिजली संकट झेलने को मजबूर है।

यही नहीं बिहार के बरौनी बिजलीघर पर भी कोयला संकट की काली छाया मंडराने लगी है। कोयले की किल्लत के कारण यहां मजबूरी में उत्पादन आधा कर देना पड़ा है। बरौनी बिजलीघरों को पूरी क्षमता के साथ चलाने पर वहां मात्र चार से पांच दिन के कोयले का ही स्टॉक है। मजबूरी में बिजलीघर को अपना उत्पादन कम करना पड़ रहा है।
 तालचर, फरक्का बिजलीघरों से बिहार की आपूर्ति आधी हो गई है।

इन बिजलीघरों का अपना उत्पादन भी पहले की अपेक्षा काफी कम हो गया है। बताया जाता है कि अगर शीघ्र इन बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति नहीं की गई तो क्षमता के अनुरूप बिजली का उत्पादन दूर की बात हो जाएगी। कोयले की कमी को दूर करने के लिए एनटीपीसी ने विदेशों से कोयले का आयात शुरू किया है लेकिन उससे भी संकट हल नहीं हो पा रहा है।

सूबे के बरौनी बिजलीघर की स्थिति और बदतर है। यहां पूरी क्षमता से उत्पादन करने पर मात्र चार दिनों का ही कोयला है। इसीलिए यहां मजबूरी में क्षमता से उत्पादन आधी करनी पड़ रही है।

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