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सरकार को दस्तावेज सौंपे आयकर : कोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने पूर्व मंत्रियों की आय से अधिक संपत्ति से संबंधित दस्तावेज सरकार को सौंपने का निर्देश आयकर विभाग को दिया है। अदालत ने दस्तावेजों के आधार पर सरकार को जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया। दुर्गा उरांव की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र एवं जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट ने यह निर्देश दिया।ड्ढr सुनवाई के दौरान आयकर विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि इस केस में उपलब्ध दस्तावेज एवं अखबारों में प्रकाशित खबरों के आलोक में विभाग को प्रथम दृष्टया यह प्रतीत हुआ कि मंत्रियों के पास आय से अधिक संपत्ति है। इस कारण सभी पूर्व मंत्रियों को नोटिस दिया गया। नोटिस के बाद जवाब आयेगा। जब तक मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक यह कहना संभव नहीं होगा कि पूर्व मंत्रियों के पास आय से अधिक संपत्ति है या नहीं। इस पर अदालत ने कहा कि वह इस मामले में स्पष्ट जानकारी चाहता है। इसी कारण आयकर विभाग से जानकारी मांगी जा रही है। अदालत ने आयकर विभाग से जानना चाहा कि इस मामले पर वह कब तक रिपोर्ट देगा। इस पर विभाग ने कहा कि अभी मार्च का महीना चल रहा है। कई अधिकारी चुनाव डय़ूटी पर जा रहे हैं। इस कारण विभाग के पास अधिकारियों की कमी है। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की।ड्ढr सरकार ने नहीं दिया जवाबड्ढr प्रार्थी की ओर से कहा गया कि कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन विभाग की ओर से नहीं किया गया है। कोर्ट ने पूर्व मंत्रियों से संबंधित दस्तावेज सरकार को सौंपने का निर्देश दिया था और सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा था। सरकार ने यह कहते हुए जवाब दाखिल नहीं किया कि आयकर ने उसे दस्तावेज नहीं दिया। जबकि आयकर का कहना है कि वह सरकार को दस्तावेज नहीं देगा।ड्ढr सीलबंद लिफाफे में दस्तावेजड्ढr आयकर विभाग ने पूर्व मंत्रियों से संबंधित दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में हाइकोर्ट को सौंपा। विभाग का कहना था कि आयकर अधिनियम के अनुसार विभाग यदि किसी मामले की जांच कर रहा है, तो उसके दस्तावेज किसी दूसरी एजेंसी को नहीं दिया जा सकता। दस्तावेज तभी दिये जायेंगे, जब कोर्ट इसका आदेश दे। इसके बाद कोर्ट ने आयकर को दस्तावेज सौंपने का निर्देश दिया।ड्ढr दुलाल की याचिका पर सुनवाई से इनकारड्ढr रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में उन्हें अभी नोटिस जारी नहीं किया गया है। कोर्ट अनावश्यक इस मामले में किसी को परशान नहीं करना चाहती। आयकर से जानकारी मांगी जा रही है। इस कारण उन्हें अपना पक्ष रखने का अधिकार नहीं है। प्रार्थी को अपना जवाब आयकर विभाग को देना चाहिए। दुलाल ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर प्रार्थी पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। दुलाल पर बरियातू में 20 डिसमील गैर आदिवासी जमीन खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि उन्होंने सीएनटी एक्ट का उल्लंघन किया है। जबकि यह जमीन आदिवासी की नहीं बल्कि किसी मुसलमान की है।

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