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...जब महिलाएं बनेंगीं सरहद की निगेहबान

...जब महिलाएं बनेंगीं सरहद की निगेहबान

अपनी अंतिम प्रशिक्षण परेड के लिए कदम रखते हुए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की सभी महिला प्रशिक्षणार्थियों को पता है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली बार महिला रक्षकों की तैनाती के अपने गंतव्य से वे केवल एक कदम दूर हैं।

होशियारपुर शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित खरकां बीएसएफ शिविर ने शनिवार को एक इतिहास बनते देखा जब 175 महिला प्रशिक्षुओं को शानदार पासिंग आउट परेड के बाद संगठन में शामिल किया गया।

36 सप्ताह के लंबे प्रशिक्षण के बाद बीएसएफ की महिला जवानों को 553 किलोमीटर लंबी पाकिस्तान-पंजाब सीमा पर तैनात करने से पहले अब दो हफ्ते तक उन्नत लड़ाकू तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम पासिंग आउट परेड में महिला जवानों से सलामी लेने विशेष रूप से खरकां शिविर पहुंचे। चिदंबरम ने महिला जवानों से कहा, ‘‘यहां पर मौजूद होना एक विशेष सौभाग्य है। देश में बहुत कांस्टेबल हैं, लेकिन बीएसएफ की महिला जवानों के पहले बैच का हिस्सा होने के नाते आपके विशेष गौरव को और कोई नहीं ले सकता। आप सभी को महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी है।’’

महिलाओं के पहले बैच में पंजाब की लड़कियों की बहुलता है लेकिन इसमें पश्चिम बंगाल और असम की लड़कियां भी शामिल हैं। इनमें से 14 लड़कियां परास्नातक, 22 स्नातक और 128 कक्षा 12 पास हैं। इनमें 25 खिलाड़ी और राष्ट्रीय कैडेट कोर की 11 स्वयंसेविकाएं भी हैं।

बीएसएफ के महानिदेशक एम.एल.कुमावत ने महिला प्रशिक्षुओं की पासिंग आउट परेड को ऐतिहासिक दिन करार दिया।  उन्होंने कहा, ‘‘यह गर्व का विषय है कि बीएसएफ ने महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। हमारे लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है।’’

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