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भारतीय ने बनाई प्रदूषण से निपटने की तकनीक

भारतीय ने बनाई प्रदूषण से निपटने की तकनीक

भारतीय मूल के एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कार्बन-डाइऑक्साइड को इसके स्रोत से और अधिक उन्नत तरीके से अलग करने की एक तकनीक तैयार की है।

लारेंस लिवरमोर नेशनल लैबोरेटोरी (एलएलएनएल) में अनुसंधानकर्ता अमितेश मैती ने आयनिक द्रव विलायक का उपयोग कर कंप्यूटेशनल छंटनी विधि का विकास किया है, जिससे कार्बन-डाइऑक्साइड को अलग करने की प्रक्रिया उन्नत होगी। इस प्रक्रिया का नाम कार्बन कैप्चर रखा गया है।

आयनिक द्रव एक प्रकार के लवण होते हैं, जो 100 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पिघल जाते हैं। पारंपरिक विलायकों की तुलना में कार्बन- डाइऑक्साइड को प्रदूषणकारी स्रोत से अलग करने में यह बहुत फायदेमंद होता है।

मौजूदा कार्बन कैप्चर तकनीक आम तौर पर विलायक के रूप में प्रयोग में आने वाले मोनोएथेनालएमीन (एमईए) पर आधारित है, जो रासायनिक रूप से कार्बन-डाइऑक्साइड का अवशोषण करता है ।

एमईए के लिए बड़े पैमाने पर उपकरणों की जरूरत होती है और यह बहुत कम से तापमान पर काम करता है।

 

 

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