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टैक्स रिटर्न आ गया आखिरी पड़ाव

पिछले सप्ताह हमने आपको बताया कि रिटर्न फाइल करने के लिए कौन-कौन से डाक्यूमेंट की जरूरत पड़ती है और उनका हिसाब-किताब कैसे लगाएं। अब आपको निर्धारित प्रारूप में टैक्स रिटर्न फॉर्म भरना है और उसे इनकम टैक्स विभाग के पास जमा कराना है। इस बारे में जनकारी दे रहे हैं सुनील धवन और स्वामी सरन शर्मा

वेतनभोगियों के लिए दो तरह के इनकम टैक्स रिटर्न फार्म आईटीआर-1 तथा आईटीआर-2 होते हैं। यदि आपकी आय के स्रोत गत सप्ताह इसी पृष्ठ पर प्रकाशित लेख में बताए अनुसार पांच स्रोतों में से किसी एक या ज्यादा केटेगरी में आती हैं तो आपको तय करना होगा कि आप कौन-सा फार्म भरेंगे। यदि आप वेतन, पेंशन या ब्याज से आय हासिल कर रहे हैं तो आपको आईटीआर-1 भरना होगा। यदि आपको किसी तरह का कैपीटल गेन, किसी हाउस प्रॉपर्टी से आय या नुकसान हुआ है तथा किसी अन्य स्रोत से आय हुई है तो आपको आईटीआर-2 फाइल करनी होगी। आप इनमें से किसी फार्म को इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं।

बकाया टैक्स देनदारी
आपके द्वारा पहले गणना करके निकाली गई टैक्स देनदारी में से टीडीएस (स्रोत पर टैक्स की कटौती) घटा लें जिससे आपको यह पता चल सकेगा कि आपको किसी तरह का कोई टैक्स देना है या नहीं। यदि देनदारी बनती है तो रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 280 भरें और किसी भी बैंक में देय टैक्स के साथ नकद या चैक में जमा करें। आप इसे इंटरनेट बैंकिंग के जरिए भी जमा करा सकते हैं। इन दोनों मामलों में आपको एक रसीद संख्या मिलेगी जिसे आईटीआर में लिखना होगा।

रिफंड के लिए क्या करना होगा
यदि आप टैक्स रिफंड के हकदार हैं तो अपने संपर्क विवरण के अतिरिक्त आपको फार्म में बैंक के विवरण भी लिखने होंगे। अपने बैंक की शाखा का एमआईसीआर नंबर लिखना भी महत्वपूर्ण है। एमआईसीआर चैक पर चैक नंबर के साथ लिखा नौ अंकों वाला नंबर होता है। यदि आप समय पर अपनी रिटर्न फाइल करते हैं तो कर निर्धारण वर्ष की शुरुआत से रिफंड राशि पर आपको ब्याज मिलेगा।

कैसे फाइल करें
रिटर्न को पारम्परिक कागजी तरीके से या नेट पर इलेक्ट्रॉनिकली भरा जा सकता है।
ऑफलाइन आपके पास दो विकल्प हैं-आप या तो रिटर्न फॉर्म खुद भर कर या किसी सीए से या टैक्स रिटर्न प्रिपेयरर की मदद से भरवा कर निकटतम इनकम टैक्स ऑफिस में जमा करवा सकते हैं। आप रिटर्न फॉर्म भरने के लिए इनकम टैक्स ऑफिस के जन संपर्क अधिकारी से मदद ले सकते हैं। फॉर्म के साथ कोई दस्तावेज या किसी तरह का निवेश साक्ष्य संलग्न नहीं करना होगा, लेकिन अपने साथ फोटोकॉपी या ओरिजिनल इनकम टैक्स के दफ्तर ले जना न भूलें।  यदि आपको अपने आंकड़ों को प्रमाणित करने के लिए कहा जाएगा तो ये आपकी मदद करेंगे। सीए आपकी इनकम स्लैब तथा आय के स्रोतों के हिसाब से अपनी फीस लेते हैं। साधारण तौर पर यह 300 रुपये लेकर 2000 रुपये तक हो सकती है।

ऑनलाइन  इसे ई-फाइलिंग कहा जता है और यह तरीका तेजी से बढ़ रहा है। ई-फाइलिंग साइट टैक्सस्पैनर डॉट कॉम के प्रबंध निदेशक अंकुर शर्मा कहते हैं कि इस वर्ष भी ई-फाइलिंग तेजी पर है। पिछले वर्ष भी केवल जून में ई-फाइलिंग ने जोर पकड़ा था तो इस वर्ष मई में ही तेजी शुरू हो चुकी है। पिछले वर्ष 48 लाख लोगों ने ई-रिटर्न फाइल की गईं थीं जिसमें से 40 लाख व्यक्तिगत तथा नॉन कॉरपोरेट द्वारा भरी गईं थीं।

शर्मा कहते हैं कि नियोक्ता से डिजिटल हस्ताक्षर वाले फार्म 16 की उपलब्धता ने ई-फाइलिंग की लोकप्रियता को और बड़ा दिया है। जिन कर्मचारियों के पास डिजिटल हस्ताक्षर वाले फार्म 16 हैं, वे सीधे इसे हमारे पास भेज सकते हैं और उनकी रिटर्न ऑटोमैटिक तरीके से भरी जएंगी। उन्हें फार्म भरने की जरूरत नहीं होगी।

ई-फाइलिंग की प्रक्रिया
अपनी रिटर्न को ई-फाइल करने के लिए आपको वेबसाइट के सॉफ्टवेयर में फार्म 16 के विवरण भरने होंगे जो अपने आप एक्सएमएल फॉर्मेट में इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न तैयार कर देगा। यह फॉर्मेट विभिन्न सूचना प्रणालियों में मौजूद डाटा की शेयरिंग में मदद करता है। आपके डेस्कटॉप पर एक्सएमएल फॉर्मेट के साथ एक पीडीएफ फाइल भी बन जाती है। आप इस आईटीआर फॉर्म को डाउनलोड भी कर सकते हैं और उसे आईटी ऑफिस में जमा कराकर पावती भी हासिल कर सकते हैं।
साथ ही साथ आप एक्सएमएल फाइल को अपने डेस्कटॉप पर भी सेव कर सकते हैं और फिर पर अपलोड कर सकते हैं। प्राइवेट साइट आपकी तरफ से सरकारी साइट पर इसे अपलोड करेंगी। आपको ई-मेल से पावती मिलेगी।

डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल
डिजिटल सिग्नेचर के इस्तेमाल से बिना पेपरवर्क और आईटी ऑफिस में जाए बिना ई-फाइलिंग की प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। यदि डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया जाता है तो उसकी पावती टैक्सपेयर को ई-मेल के द्वारा भेज दी जाती है।

डिजिटल सिग्नेचर क्यों? यद्यपि यह अनिवार्य नहीं है लेकिन इलेक्ट्रॉनिकली रिटर्न फाइल करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। डिजिटल सिग्नेचर वाले डॉक्यूमेंट को बिल्कुल पेपर पर किए गए हस्ताक्षर के समान मान्यता दी जती है। बहरहाल, ई-फाइलिंग के लिए डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग थोड़ा खर्चीला है - हर वेबसाइट का अपना शुल्क है और उसकी वधता एक या दो वर्ष तक है। डिजिटल सिग्नेचर की कीमत आपके द्वारा चुने गए पैकेज में ही शामिल होगी।

डिजिटल सिग्नेचर सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसी सहित प्राइवेट और सरकार की इस उद्देश्य के लिए बनाई गई वेबसाइट्स से प्राप्त किया जा सकता है। टैक्स साइट से डिजिटल सिग्नेचर प्राप्त करने के लिए संबद्ध फॉर्म डाउनलोड करें, उसे भरें, संबद्ध दस्तावेज संलग्न करें जैसे पहचान तथा पते के साक्ष्य तथा उसे संबद्ध पते पर कुरियर कर दें। डिजिटल सिग्नेचर हासिल करने की पूरी प्रक्रिया में 15 दिन लगते हैं।

डिजिटल सिग्नेचर के बिना ई-फाइलिंग
डिजिटल सिग्नेचर के बिना ई-फाइलिंग भी इसी तरह से सुविधाजनक है। ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने के बाद टैक्सपेयर को पावती मिलती है जिसे आईटीआर-वी कहा जाता है। वर्ष 2008 तक आईटीआर-वी अपने निकटतम आईटी ऑफिस में जमा कराना होता था जिससे यह पूरी तरह से दौड़-धूप वाली कवायद बन जाती थी। इस वर्ष से यह फार्म बंगलुरु में एक निर्दिष्ट ऑफिस में कुरियर करना होगा जिससे यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।

ई-फाइलिंग साइट
ई-फाइलिंग की सुविधा वाली प्रमुख साइट्स www.taxspanner.com, www.taxshax.com, www.taxsmile.com हैं। यह वेबसाइटें सेवाओं की अलग-अलग कीमतें वसूलती हैं। सरकार की भी इस तरह की सुविधा देने वाली एक निशुल्क साइट है इसका यूआरएल एड्रेस www.incometaxindiaefiling.com। इस साइट पर रजिस्ट्रेशन के लिए आपको यूजरनेम के रूप में अपना पैन नंबर इस्तेमाल करना होगा।

उपरोक्त तीनों गैर-सरकारी साइट सुरक्षित और प्रयोग में आसान हैं। ये दो मामलों में एक-दूसरे से अलग हैं-पहला आय के स्रोत जो उसके दायरे में आते हैं और उसकी प्रक्रिया। इनमें से किसी का चयन करने से पहले कीमत और पेश की जाने वाली सुविधाओं की पड़ताल कर लें। www.taxsmile.com के एमडी रवि जगन्नाथन कहते हैं कि स्पेशल केस जैसे एरियर या इनकम की क्लबिंग का भी ख्याल रखना चाहिए। यह आपको सारी प्रक्रिया को फिर से दोहराने के झंझट से मुक्ति देगा। सस्ता पैकेज आमतौर पर केवल वेतन से होने वाली आय के लिए होता है। यदि आपकी अन्य स्रोत से आय हो रही है तो आपको इसका एडवांस वर्जन लेना होगा। टैक्स स्पैनर केवल निजी साइट है जो आईटीआर-4 भर सकती है जो बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम वाले व्यक्तियों के लिए है।

डेडलाइन मिस हो जाए तो क्या?
यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा से चूक जाते हैं तो आपके पास दो विकल्प होंगे। यदि कोई टैक्स देनदारी बकाया नहीं है तो आप 31 मार्च तक बिना जुर्माना रिटर्न फाइल कर सकते हैं। बहरहाल, यदि आपको टैक्स देना है और समय सीमा से चूक जाते हैं तो 31 मार्च तक रिटर्न फाइल करने पर आपको मासिक जुर्माना ब्याज देना होगा। यदि आप यह सीमा भी चूक जाते हैं तो आपको मासिक ब्याज जुर्माने के साथ 5,000 रुपये का दंड भी चुकाना होगा।

इसके प्रभाव यदि आप रिफंड के हकदार हैं तो इस पर ब्याज रिटर्न फाइल करने की तारीख से दिया जएगा। यदि आप समय पर रिटर्न फाइल करते हैं तो आप किसी गलती या छूट जैसे कोई विशेष डिडक्शन का उल्लेख करना रह जाना, को ठीक करने के लिए 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

बहरहाल, यदि आप समय पर रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो आप इस सुविधा का फायदा नहीं उठा सकेंगे। साथ ही यदि आपको वर्ष के दौरान शेयरों में नुकसान हुआ है तो समय पर टैक्स रिटर्न फाइल करने पर ही आप भविष्य के टैक्स सेट-ऑफ में हानि को एडजस्ट कर सकेंगे।

अब आपके पास जरूरी जानकारी पहुंच चुकी है, रिटर्न भरने की प्रक्रिया शुरू करें क्योंकि अभी वक्त आपकी तरफ है। इसके बाद अगले साल इसी वक्त तक करें रिलैक्स।

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