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लक

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सितारे : संजय दत्त, मिथुन चक्रवर्ती, इमरान खान, डैनी डैनजोंगप्पा, रवि किशन, श्रुति के. हासन, चित्राशी रावत
निर्माता/बैनर :  ढिल्लिन मेहरा / श्री अष्टविनायक सिनेविजन लि. और स्टूडियो 18
निर्देशक एवं लेखक : सोहम शाह
गीत :  शब्बीर अहमद और अन्विता दत्त गुप्तान
संगीत : सलीम-सुलेमान

कहानी : मुसीबतों से घिरे राम मेहरा (इमरान खान) को अमेरिका जाने के लिए 20 लाख रुपये की जरूरत है, जिसके लिए उसे चोरी तक करनी पड़ती है। आड़े वक्त में उसका हाथ थामता है लाखन तमांग (डैनी डैनजोंगप्पा), जो कि बैटिंग की दुनिया के बादशाद करीम मूसा (संजय दत्त) के लिए काम करता है। खुद को बदकिस्मत मानने वाले राम में किस्मतवाला होने का गुण लाखन भांप लेता है। लाखन मूसा के लिए राम जैसे ही लकी यानी किस्मतवाले लोगों को इकट्ठा करता है। वो भी एक ऐसे खेल के लिए, जिसमें इंसानों की मौत दांव पर लगाई जाती है। लाखन राम को लाखों नहीं करोड़ों कमाने की दावत दे अपने साथ साउथ अफ्रीका ले जाता है। वह राम के अलावा कर्नल वीर प्रताप सिंह (मिथुन चक्रवर्ती), राघव (रवि किशन) और शॉर्टकट (चित्राशी रावत) को भी इस खेल की दावत दे अपने साथ मूसा के पास ले आता है। इस खेल में एक और खिलाड़ी आयशा (श्रुति के. हासन) भी जुड़ जती है, जो पहले भी इस सौदे में अपनी किस्मत आजमा चुकी है। मूसा और लाखन की नजर में मौत के इस खेल में शामिल होने वाले ये सभी लोग लकी हैं। इनमें से किसी के लिए जीत का पैसा जरूरत है तो किसी के लिए जुनून। इस खेल में देश-विदेश से कई और लकी लोग भी शामिल होते हैं। करोड़ों डॉलर उन पर लगाए जाते हैं। ऐसे में मूसा इन्हें 20 दिन में 20 करोड़ रुपये कमाने का ऑफर करता है, जिसके लिए इन्हें अपनी जान के साथ-साथ किस्मत भी दांव पर लगानी पड़ती है।

निर्देशन : किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म में संवादों और इमोशन का तड़का कैसे लगाया जाता है, यह निर्देशक सोहम शाह ने एक फिल्म (काल) के फ्लॉप होने के बाद सीख लिया है। उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती, संजय दत्त और डैनी जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ इमरान खान, रवि किशन, चित्राशी और श्रुति हासन जैसी नई एक्ट्रेस को इस तरह से फिट किया है कि पूरी स्टार कास्ट एक टीम की तरह काम करती दिखती है। उनके निर्देशक का यह प्लस प्वॉइंट भी है और पॉजिटिव भी। करोड़ों रुपये के दांव के साथ मौत के खेल के रोमांच को उन्होंने वो ऊंचाई दी है कि लोग सीट से हिल नहीं सकते। फिल्म में संतोष थुंडीयिल्स की फोटोग्राफी का उन्होंने बेहतरीन इस्तेमाल किया है। कहीं-कहीं खराब स्क्रीनप्ले और गले न उतरने वाले दृश्यों के बावजूद उन्होंने एक एक्शनपैक्ड दमदार फिल्म बनाई है, जिसमें बोरियत का नामो निशान नहीं है।

अभिनय : इसमें कोई शक नहीं कि इस फिल्म के माध्यम से इंडस्ट्री को श्रुति हासन जैसी नई स्टार मिलने जा रही है। अनुभवी सितारों के सामने उन्होंने गजब का अत्मविश्वास दिखाया है। फिल्मों में आने से पहले ही उन्हें ग्लैमरस गर्ल का टैग मिल चुका है। बावजूद इसके, उनके अभिनय को इग्नोर नहीं किया जा सकता। इमरान पहले से काफी बेहतर लगे। रवि किशन भीड़ में अलग दिखाई देने वालों में से हैं। उनके हर सीन पर लोगों ने रेस्पॉन्स किया। चित्राशी रावत ने अच्छा एंटरटेन किया। और संजय दत्त, डैनी तथा मिथुन दा के बीच संवादों और स्टाइल की चिंगारी देखने लायक है। खासतौर से मिथुन दा का ‘कोई शक’ डायलॉग। मूसा का रोल संजय दत्त पर ही फिट बैठ सकता था, यह उन्होंने दिखा दिया है। डैनी साहब की संवाद अदायगी फस्ट रेट रही।

गीत-संगीत : विभिन्न दृश्यों में अमर मोहिले का बैकग्राउंड म्यूजिक शानदार है। ‘आजमा लक आजमा’ कुछ खास दृश्यों में इसे कई बार इस्तेमाल किया गया है, जो प्रभावी है। श्रुति पाठक और नरेश कामत की आवाज में गीत ‘जी ले’ सुनने के साथ-साथ देखने में भी काफी अच्छा है।

क्या है खास : स्टंट सीन्स, सितारों के बीच संवाद अदायगी।

क्या है बकवास : रवि किशन का इमरान खान पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना गले नहीं उतरता।

पंचलाइन : ढेर सारे सितारों के साथ फुल टाइम एंटरटेनमेंट।

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