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गोर्शकोव की खरीद पर लुट गई सरकार

गोर्शकोव की खरीद पर लुट गई सरकार

विमान वाहक जहाज एडमिरल गोर्शकोव की रूस से लंबी खरीद प्रक्रिया की कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने कड़ी आलोचना की है। अपनी ताजा रिपोर्ट में कैग ने जहाज की कीमत में 7 हजार करोड़ रुपये की बेतहाशा वृद्धि पर रक्षा मंत्रालय की खिंचाई की है। कैग ने कहा कि देश में अब तक हुए रक्षा सौदे में इतना बड़ा नुकसान पहले कभी नहीं हुआ।

सरकार चाहती तो जनता की गाढ़ी कमाई के ये सात हजार करोड़ रुपये बचा सकती थी जिससे सात लाख गरीब लोगों को आवास मुहैया कराया जा सकता था। कैग ने इस परियोजना की मॉनीटरिंग को आश्चर्यजनक रूप से ढीली पाया है, जिस पर निगाह रखने के लिए कोई निगारनी कमेटी नहीं बनाई गई। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने इस जहाज की पुनर्सज्जा के लिए 66 फीसदी धनराशि का भुगतान कर दिया लेकिन काम महज 35 फीसदी ही हुआ है।

शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कैग ने मंत्रालय की बुद्धिमत्ता पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि ऐसे सेकंड हैंड रूसी युद्धक जहाज को खरीदने में कहां की समझदारी नहीं है जिसकी आयु आधी रह गई है और जो नए युद्धक विमान से 60 फीसदी महंगा हो। कैग को इस बात पर भी शक है इस जहाज पर क्लोज इन वैपन सिस्टम लगा होगा।

यह सिस्टम विमान वाहक जहाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो एंटीशिप मिसाइलों तथा दुश्मन के शार्ट रेंज विमानों को नष्ट करने के काम आता है। इसका नतीजा यह हुआ कि पुराने विमान वाहक को अपने बेड़े में शामिल कर क्षमताएं बढ़ाने का नौसेना का उद्देश्य समाप्त हो गया। रूस के साथ भारत ने यह डील 2004 में शुरू की थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को अब कीव श्रेणी के विमान वाहक के लिए एक अरब 82 करोड़ डॉलर देने होंगे जबकि मूलत: यह डील 8.75 करोड़ डॉलर में हुई थी। इसके अलावा यह जहाज भी नौसना को दिसंबर 2012 में मिल पाएगा। कैग ने बताया कि गत वर्ष तक सरकार इसके लिए समझोते ही कर रही थी। इस बारे में कैग ने मंत्रालय से जवाब मांगा था लेकिन सरकार ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोर्शकोव की कीमत सी ट्रायल के कारण बढ़कर 52.20 करोड़ डालर हो गई जबकि इसका मूल अनुबंध 27 करोड़ डालर का ही था।

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