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विपक्ष का भारी हंगामा, नहीं चली विधानसभा

रिपोर्टर टेबुल पर चढ़कर महिला विधायकों ने की जमकर नारेबाजी
सदन में हिन्दुस्तान की प्रतियां लहरायी गईं
मॉनसून सत्र में पहली बार एकजुट दिखा विपक्ष
विपक्ष के तेवर के आगे नरम पड़ा सत्ता पक्ष
कार्यस्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं करने से भड़का विपक्ष
विधान परिषद में भी विपक्ष ने लाया कार्यस्थगन प्रस्ताव

 

सूबे में बढ़ते महिला उत्पीड़न और पटना में युवती के साथ हुए र्दुव्यवहार के मुद्दे पर विधानसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और शुक्रवार को कार्यवाही नहीं चलने दी। दोषी लड़के और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष इतना उत्तेजित था कि वह पूरे दिन वेल में रहा। राजद, कांग्रेस और बसपा की महिला विधायकों ने तो रिपोर्टर टेबुल पर चढ़कर सरकार विरोधी नारे लगाये। सीपीआई और माले विधायक  रिपोर्टरों की कुर्सी को टेबुल पर जोर-जोर से पटकते रहे। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के आग्रह को ठुकरा कर विपक्ष की सम्पूर्ण महिला विधायकों ने भी पहली बार एकजुट हो भारी हंगामा किया। अपनी मांग पूरी नहीं होती  देख शाम में सम्पूर्ण विपक्ष वॉक आउट कर गया।


विपक्ष के तेवर के कारण विधानसभा अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष विपक्ष से सीट पर जाने का अनुरोध करते रहे पर सम्पूर्ण विपक्ष अध्यक्ष के निर्देश को अनसुना कर महिला उत्पीड़न बन्द करो, नीतीश सरकार हाय-हाय के नारे लगाता रहा। वे हाथों में हिन्दुस्तान समेत अन्य समाचार पत्रों की प्रतियां लहराते रहे। सरकार विरोधी नारे लिखी तख्तियां और पोस्टर लेकर महिला को सुरक्षा दो-सुरक्षा दो, की नारेबाजी करते रहे। मानसून सत्र का यह पहला दिन था जब विपक्ष के कड़े तेवर के आगे सत्ता पक्ष नरम दिखा। इस मामले पर विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कार्रवाई नहीं होता देख विपक्ष आगबबूला हो गया।   
    

प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू होते ही राजद, कांग्रेस, लोजपा, बसपा, माले, सीपीआई और सीपीएम के सदस्य वेल में पहुंच सुशासन सरकार हाय-हाय के  नारे लगाने लगे। धीरे-धीरे सभी विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गये। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष की मांगों को दरकिनार कर अल्पसूचित प्रश्न पूछने की कार्यवाही शुरू की तो विपक्षी विधायक और आक्रोशित हो गये। वे जोर-जोर से सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। देखते-देखते राजद की महिला विधायक प्रेमा चौधरी और बीमा भारती, कांग्रेस की सुनीला देवी और सुनीता देवी तथा बसपा की सीता सुंदरी देवी रिपोर्टर टेबुल पर चढ़ गईं और सुशासन सरकार हाय-हाय, चीरहरण बन्द करो-बन्द करो, दोषी को फांसी दो-फांसी दो आदि कई नारे लगाते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई और वक्तव्य की मांग करने लगीं। 
     

भारी शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष विपक्ष को बार-बार समझते रहे कि यह गंभीर और संवेदनशील विषय है। आसन ने सरकार से वक्तव्य देने को कहा है, प्रश्नकाल के बाद सरकार अपना पक्ष रखेगी। आप सीट पर जायें। लेकिन विपक्ष के तेवर के आगे उनकी बात अनसुनी रह गई। उधर विधान परिषद में भी शून्य काल में विपक्ष के नेता गुलाम गौस ने मामले को उठाया। कांग्रेस के डा. महाचन्द्र प्रसाद सिंह और सीपीएम के वासुदेव सिंह के कार्यस्थगन प्रस्ताव को विधानपरिषद सभापति ने स्वीकार नहीं किया और कहा कि सोमवार को सरकार इस मामले पर जवाब देगी।

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