DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बनना तो रेलमंत्री ही

सांसद महोदय अपने चुनावक्षेत्र के धन्यवादी दौरे पर निकले। वे देर से भी नहीं निकले। अभी दो ही महीने हुए हैं चुनाव हुए, वे अगर दो साल बाद भी अपने मतदाताओं को धन्यवाद देने पहुंच जाते तो मतदाता उनके धन्यवादी होते। हां, चौथे-पांचवें साल में अवश्य ही थोड़ी प्रॉब्लम होती है। वे बंगाल से भी चुनकर नहीं आए हैं। उन्हें अपने राज्य की सरकार को उखाड़ना भी नहीं है। चुनाव जीतने के बाद दिल्ली आ गए थे, फिर संसद सत्र शुरू हो गया। तुरंत ही बजट सत्र आ गया। पता ही नहीं चला कि दो महीने कब निकल गए।
दौरे पर वे सबसे पहले जिस गांव में पंहुचे, वहां जोरदार स्वागत हुआ। वे प्रभावित होकर बोले-जो भी समस्या हो बताइए। गांववालों ने कहा-नहीं, समस्या तो कोई नहीं है, बस हमारे यहां रेल चला दो और एक रेल कोच फैक्टरी डाल दो। उन्हें ऐसी मांग की उम्मीद नहीं थी। बोले- यह तो संभव नहीं है। क्यों संभव नहीं है, जब लालूजी की ससुराल तक रेल जा सकती है, जब सारी ट्रेनें पासवानजी के हाजीपुर से जा सकती हैं और जब सारी नयी ट्रेनें ममता बनर्जी के बंगाल के लिए चल सकती हैं तो हमारे यहां रेल क्यों नहीं आ सकती।

सांसद महोदय के चंगू-मंगुओं ने देखा कि वे फंस गए हैं तो बचाव के लिए आगे आए। एक बोला-देखिए, रेल बजट पर बहस के समय हमारे नेताजी ने अपने क्षेत्र में नयी रेलगाड़ियां चलाने की मांग तो उठायी थी। पर ममता दीदी ने कहा कि जिस तरह से सब नयी ट्रेनें मांग रहे हैं उससे तो मुझे हजारों नयी ट्रेनें चलानी पड़ेंगी। गांववालों ने कहा-तो चला दें। अपने लिए चलायी हैं तो हमारे लिए भी चला दें।
हां-सांसद महोदय ने कहा-पर वे अपने लिए ही चला सकती हैं, क्योंकि वे रेल मंत्री हैं। तो तुम क्यों नहीं हो रेल मंत्री-गांववालों ने कहा। चंगू-मंगुओं ने फिर बात संभाली। एक बोला- पर सभी मंत्री नहीं हो सकते हैं न। वैसे हमारे नेताजी का नाम चर्चा में है और जब भी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, उसमें ये शामिल हो सकते हैं। तो ठीक है-गांववालों ने कहा-जब मंत्री बनना तो रेल मंत्री ही बनना और हमारे यहां भी रेल चलाना।
अगले पड़ाव में नेताजी ने समस्या कतई नहीं पूछी। चंगू-मंगुओं ने कमान संभाली। एक बोला-आपने हमारे नेताजी को सांसद के रूप में चुनकर भेजा। पार्टी उन्हें अब मंत्री भी बना सकती है। लोगों की उत्सुकता जागी-कौन सा मंत्री? उन्होंने इस प्रश्न की अपेक्षा नहीं की थी। फिर खुद लोगों ने ही कहा-रेल मंत्री ही बनना। वही सबसे अच्छा वही रहता है। फिर हमारे हमारे यहां से भी रेल चलाना।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बनना तो रेलमंत्री ही