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परिवार परामर्श केंद्र भी जुटा विवाद निपटाने में

नव विवाहितों के लिए दांपत्य जीवन की राह पथरीली साबित हो रही है। जीवन भर साथ निभाने का वादा करके भी अलग राह चुन रहे हैं। मगर इसके लिए भी कोर्ट का सहारा लिया जा रहा है। परिवार परामर्श केंद्र से भी काफी मामलें अदालतों में जा रहे हैं।


दांपत्य जीवन से संबंधित पारिवारिक मामलों को शांतिपूर्वक निपटाने के लिए परिवार परामर्श केंद्र की स्थापना की गई है। पुलिस लाइन स्थित इस केंद्र में हर बुधवार को पारिवारिक विवाद सुलझने को पंचायत बुलाई जाती है। जिसमें काउंसलरों की मदद से पति-पत्नी के बीच पैदा हुए विवादों को निपटाने के प्रयास किए जाते हैं। मगर अब परिवार परामर्श केंद्र भी दांपत्य जीवन में आ रही दरारों को पूरी तरह भर पाने में नाकाम साबित हो रहा है और अलगाव के लिए अदालत की चौखट पर जाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। हर महीने अदालत में सैकड़ों विवाहित जोड़े तलाक या गुजरा भत्ता के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करते हैं। अलगाव के लिए समय के फेर को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। परिवार परामर्श केंद्र के शुरुआती दौर में काउंसलर काफी मामलों में दंपत्तियों में समझोते करा देते थे। पर समय के साथ समझौते होने वाले मामलों की संख्या घटती जा रही है। काउंसलरों का कहना है कि पहले करीब 90 फीसदी मामलों में समझने के बाद दंपत्ति आपस में सुलह कर लेते थे। मगर अब यह आंकड़ा घट गया है। जो लोग एक राह चलने पर सहमति नहीं बना पाते, वह अलगाव के लिए कोर्ट चले जाते हैं। काउंसलरों का कहना है कि एक-दूसरे की बात को नहीं समझने और तवज्जो नहीं दिए जाने से दांपत्य विवाद बढ़ रहे हैं। इन्हें खत्म करने के लिए जरूरी है कि दोनों साथी एक दूसरे की कद्र करें और विचारों को समझे।

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