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अब मनमर्जी से नहीं कर पाएंगे हड़ताल

आए दिन होने वाली वकीलों की हड़ताल और मनमानी अब नहीं चल पाएगी। बार एसोसिएशन गाजियाबाद ने वकीलों की हड़ताल और मनमानी पर लक्ष्मण रेखा खींच दी है। एसोसिएशन ने शोक प्रस्तावों पर फुल डे की बजय हाफ डे ऑफ करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। वकीलों के दुराचरण के बारे में अब सीधे यूपी बार काउंसिल को मामला भेज जाएगा।


लंबे समय से कचहरी का कामकाज विभिन्न कारणों से होने वाली वकीलों की हड़ताल के कारण प्रभावित हो रहा है। इससे वादकारियों के साथ-साथ वकीलों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या पर विचार कर बार एसोसिएशन ने अंकुश लगाने की पहल की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवदत्त त्यागी ने बताया कि फुल डे हड़ताल से होने वाले नुकसान को देखते हुए कार्यकारिणी ने कुछ प्रस्ताव पास किए हैं। जिसमें किसी वकील की मृत्यु होने पर उसकी अंत्येष्टि अगर वर्किग टाइम से पहले हो गई है तो शोक सभा कर अधिवक्ता दोपहर तीन बजे के बाद ही कार्य से विरत होंगे। किसी वकील के परिवार में कोई मृत्यु होने पर भी दोपहर बाद ही कार्य बहिष्कार हो पाएगा। किसी अधिवक्ता के साथ कोई दुर्घटना या हादसा होने की स्थिति में कोई कार्रवाई नहीं होने पर बार एसोसिएशन संज्ञान लेगी। बार के पदाधिकारी ही पहले शासन-प्रशासन के अधिकारियों से मिलेंगे। इसके बाद भी सुनवाई नहीं होने पर कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर हड़ताल या कार्य बहिष्कार पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दूसरे स्थानों पर वकीलों के साथ हुई दुर्घटनाओं पर केवल यूपी बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर ही हड़ताल आदि का फैसला होगा। किसी वकील के दुराचरण में लिप्त होने की शिकायत को अब सीधे यूपी बार काउंसिल को भेज जाएगा। कार्यकारिणी ने यह प्रस्ताव वकालत को प्रभावित करने वाले कारकों को दूर करने के लिए पास किया है। इस प्रस्ताव को नोटिस बोर्डो पर चस्पा किया जाएगा।

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