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तीन बेटे खोने वाले दंपति ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

तीनों बेटों की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने के बावजूद उसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाने के कारण ही उन्हें अपने बच्चों को खोने पड़े। पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती तो उन्हें बचाया जा सकता था। यह कहना है कि संजय के माता-पिता रामस्वरूप व मोहन देई का। उनका आरोप है कि उन्होंने जब भी शिकायत दर्ज कराई इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह है कि पिछले दो महीने में उनके दो बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया।
मिल्हाड़ कालोनी के इस दंपति का कहना है कि तीन साल पहले जब उसका 16 वर्षीय सोनू लापता हुआ तो उन्होंने सेक्टर-11 पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी।

तब पुलिस कर्मियों ने उन्हें यह कहकर चुप करा दिया कि उनका लड़का घूम-फिर कर वापस घर लौट आएगा। पुलिस वालों की बेरुखी देखकर उन्होंने अपने स्तर पर लड़के की खोजबीन की, पर कुछ पता नहीं चला। इस बीच उनका पुलिस वालों से सम्पर्क बना रहा। हार कर वे चुपचाप बैठ गए। फिर 4 मई 09 को उनका मंझला छोटा बेटा सुनील घर के बाहर खेलते अचानक गायब हो गया। इस बार भी पुलिस ने रिपोर्ट लिखने में काफी आना-कानी की। पांच दिनों तक रिपोर्ट लिखवाने के लिए चौकी के चक्कर कटवाए गए। कभी लोकसभा चुनाव का बहाना बनाया गया तो कभी छुट्टी का। 9 मई को लापता सुनील की रिपोर्ट लिखी गई। 13 मई को उसके बेटे की क्षत-विक्षप्त लाश दिल्ली अपोलो अस्पताल के पास मिली।

अभी परिवार इस सदमें से उबर भी नहीं पाया था कि 22 जुलाई की शाम पांच बजे उनका छोटा बेटा संजय भी रहस्यमय परिस्थिति में लापता हो गया। उसी समय रिपोर्ट लिखवा दी गई। इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई दिलचस्पी नहीं दिखाई। आरोप है कि पुलिस ने थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो संजय को बचाया जा सकता था। दंपति ने तीनों बेटों के लापता होने में पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
इधर, डीएसपी हेडक्वार्टर विनोद कौशिक का कहना है कि तीनों बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने में पुलिस ने कोई लापरवाही नहीं बरती। जिस भी तरीके से बच्चों को खोज जा सकता था उन तरीकों को पुलिस ने अपनाया।

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  • Web Title:तीन बेटे खोने वाले ने पुलिस पर लगाए आरोप