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विक्की की मौत की जांच डीएसपी एनआईटी को सौंपी

सूदखोरों की वजह से हुई युवक की मौत के मामले में उसके परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाया है। आईजी को दिए शिकायती पत्र में उन्होंने पुलिस व आरोपियों द्वारा भुक्तभोगी को धमकाने की बात कही है। इसे गंभीरता से लेते हुए आईजी ने मामले की जांच डीएसपी एनआईटी को सौंप दी है।
5 जुलाई की रात करीब नौ बजे रूपए के लेन-देन में डबुआ कलोनी के विक्की शर्मा की डबुआ सब्जी मंडी में गोली लगने से मौत हो गई थी। उसके बुआ के लड़के राजेश ने पुलिस को बताया कि विक्की ने गाजीपुर के भूरा से 1 लाख 10 हजार रुपए उधार ले रखे थे। जिसमें साठ हजार वापस कर दिए गए थें। पचास हजार देने बाकी थे। इसके लिए वह भूरा से एक दिन की मोहलत मांग रहा था। उसका आरोप है कि भूरा ने अपने साथी जिले सिंह, अमित भड़ाना, दीपक व चार-पांच अन्य के साथ मिलकर विक्की व उसके साथ मौजूद कपिल, सोनू व अरुण की लाठी डंडों से पिटाई की और पिस्तौल से विक्की के सिर में गोली मार दी। घायलावस्था में उसे एस्कॉर्ट अस्पताल में दाखिल कराया गया था। वहां से सफ्दरगंज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जहां 8 जुलाई को उसकी मौत हो गई। सारन पुलिस ने 6 जुलाई को चारों आरोपियों के खिलाफ जानलेवा हमला सहित धमकाने का मुकदमा दर्ज किया था। उसकी मौत के बाद पुलिस ने हत्या का मामला जोड़ दिया। बाद में सारन पुलिस ने कोर्ट में विक्की के आत्महत्या करने की रिपोर्ट प्रस्तुत की। विवेचक के मुताबिक सूदखोरों से तंग आकर उसने खुद को गोली मार ली थी। पुलिस द्वारा आत्महत्या की रिपोर्ट लगाने पर उसके पिता ओमकार शर्मा 16 जुलाई को आईजी पीके अग्रवाल से मिले। उन्होंने सारन एसएचओ पर आरोपियों का पक्ष लेने और मौके पर मौजूद गवाहों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। पुलिस जान-बूझकर फरार अमित और दीपक को गिरफ्तार नहीं कर रही। आईजी अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएसपी एनआईटी को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीएसपी एनआईटी दर्शन लाल मलिक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट तैयारकर आईजी को भेज दी जाएगी।

 

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