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26/11: पुलिस अधिकारी ने दोहराया हमलों का घटनाक्रम

26/11: पुलिस अधिकारी ने दोहराया हमलों का घटनाक्रम

मुंबई हमलों के दौरान कॉमा अस्पताल के समीप बंदूकधारियों और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई मुठभेड़ में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को विशेष अदालत के समक्ष बीते साल 26 नवंबर का घटनाक्रम दोहराया जब मुठभेड़ में आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मारे गए थे।

हमले में मारे गए इंस्पेक्टर विजय सालस्कर के सहायक अरूण जाधव ने अदालत को भावुक होकर बताया कि किस तरह बंदूकधारी मोहम्मद अजमल कसाब को गिरफ्तार किया गया था और कसाब का साथी अबु इस्माइल उस पुलिस जीप पर गोलियां बरसा रहा था जिसमें करकरे, सालस्कर, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अशोक काम्टे और तीन सिपाही सवार थे।

हमले की रात के बारे में बताते हुए जाधव ने कहा कि जब वह कॉमा अस्पताल पहुंचे तो वरिष्ठ अधिकारियों करकरे, काम्टे और सालस्कर ने हास्पिटल के मुख्य द्वार पर आतंकवादियों को चुनौती देने का फैसला किया और पुलिसकर्मियों के एक दल को मुख्य द्वार के सामने अपनी पोजीशन लेने का निर्देश दिया।

अरुण जाधव ने विशेष अदालत को बताया कि उन्होंने एक क्वालिस जीप ली। तीन वरिष्ठ अधिकारी आगे की दो सीटों पर बैठे, जबकि तीन अन्य सिपाही योगेश पाटिल, जयवंत पाटिल और दिलीप भोंसले के साथ वह खुद पिछली सीटों पर बैठे।

जाधव ने बताया कि उनकी गाड़ी जब कॉमा हास्पिटल के समीप रंग भवन के पास पहुंची, तभी वायरलेस पर उन्हें एक संदेश सुनाई दिया जिसमें कहा गया था कि इस इलाके में आतंकवादी छुपे हुए हैं। संदेश सुनकर काम्टे ने सालस्कर से धीरे धीरे चलने के लिए कहा।

जाधव ने कहा कि तभी अचानक उनकी ओर गोलियां चलने लगीं और उसने एवं तीनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हमलावरों पर पलटवार किया। जाधव ने कहा कि उसे एक गोली लगी जिसके बाद उसकी बंदूक गाड़ी के भीतर गिर पड़ी और उसकी हालत ऐसी नहीं रही कि वह अपनी बंदूक उठा सके। उसने कहा कि तीन—चार मिनिट तक गोलीबारी जारी रही।

जाधव ने अदालत को बताया कि मैंने दो लोगों  को देखा। उनमें से एक लंबा और दूसरा ठिगना था। दोनों हम पर गोलियां बरसा रहे थे। हमने उन पर जबावी कार्रवाई की। मुझे कोहनी और बाएं कंधे में चोट आई। जाधव ने कहा कि गोलीबारी के बाद वहां सन्नाटा पसर गया और अबु इस्माइल नामक लंबे व्यक्ति ने जीप का पिछला दरवाजा खोलने की कोशिश की।

अरुण जाधव ने विशेष अदालत को बताया कि वह हिलने—डुलने की स्थिति में नहीं था, इसलिए चुपचाप ऐसे पड़ा रहा जैसे मर चुका हो। जाधव ने बताया कि कसाब और इस्माइल ने जीप का दरवाजा खोला और पुलिस अधिकारियों के शवों को सड़क पर फेंकने लगें। सालस्कर के शव को इस्माइल ने फेंका जबकि काम्टे के शव को कसाब ने फेंका। इसके बाद उन्होंने जीप में से करकरे का शव भी बाहर फेंका।

जाधव ने बताया कि इस दौरान घायल सिपाही योगेश पाटिल का मोबाइल फोन बज उठा और कसाब ने उस पर अंधाधुंध गोलियां चला दी जिससे पाटिल के प्राण पखेरू उड़ गए। जाधव जब यह सारा ब्यौरा अदालत को बता रहा था, कसाब कटघरे में बैठा था और उसका मूड़ उखड़ा हुआ नजर आ रहा था। इस बीच वह तीन बार अचानक उठ खड़ा हुआ लेकिन अदालत ने उसे बैठे रहने का निर्देश दिया।

जाधव ने अदालत को बताया कि जीप में से पुलिस अधिकारियों के शव बाहर फेंकने के बाद कसाब और इस्माइल उस पर सवार हुए। इस्माइल गाड़ी चला रहा था और कसाब उसके बाजू में बैठा था। इस्माइल बहुत तेज गति से गाड़ी चला रहा था और पूरे रास्ते दोनों एकदम चुप रहे। जाधव ने बताया कि उसे महसूस हो रहा था कि वह कुछ करने की स्थिति में नहीं है। उसने ऐसा दिखाना जारी रखा जैसे वह कोई लाश हो।

आतंकवादी हमलों के गवाह मुंबई पुलिस के अरुण जधव ने विशेष अदालत को बताया कि बाद में उसे महसूस हुआ कि नरीमन प्वाइंट के समीप विधान भवन के पास जीप रुकी। उसने देखा कि दोनों बंदूकधारी इस जीप में से उतरे और एक दूसरी कार में सवार हुए।

जाधव ने कहा कि इसके बाद उसने नियंत्रण कक्ष को पूरी घटना की जानकारी दी और उसे अस्पताल पहुंचाया गया जहां पता चला कि उसे तीन गोलियां लगी हैं। कसाब के वकील अब्बास काजमी ने जाधव से जिरह की जिसके दौरान जाधव ने कहा कि वह पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि किसकी गोली से कसाब का हाथ जख्मी हुआ।

कसाब ने 20 जुलाई को अदालत के समक्ष मुंबई हमलों में अपनी भूमिका स्वीकार की थी और इसके बाद जाधव पहला गवाह है जिसे अदालत के समक्ष पेश किया गया है। इससे पहले विशेष न्यायाधीश एमएल टाहिलियानी ने गुरूवार को कसाब की स्वीकारोक्ति को रिकॉर्ड में दर्ज किया और मामले को जारी रखने की अनुमति दी।

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