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कम्प्यूटर ज्ञान से वंचित हो रहे बच्चे

जनपद के विद्यालयों में शौपीस बने अधिकांश कम्प्यूटर खराब पडे़ है या फिर धूल की मोटी परत जम चुकी है। न प्रशिक्षित शिक्षक है, जो कम्प्यूटर ज्ञान से बच्चों को रूबरू करा सके। लेकिन इसके बावजूद हर माह बच्चों से कम्प्यूटर निधि का शुल्क जरूर वसूला जा रहा है। अभिभावक बेबस है मगर शिक्षा महकमे के अफसर भी साफगोई से खराब व्यवस्था की बात स्वीकार करते हैं लेकिन सुधारने की बात पर चुप्पी साध लेते है।


हर माह शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों से कम्प्यूटर निधि के तहत प्रति माह दस रूपए शुल्क लिया जाता है। कम्प्यूटर निधि से शिक्षा देने के अलावा स्टेशनरी, जनरेटर, तेल, विद्युत, प्रिन्टर-कार्टेज की व्यवस्था करने का प्रावधान है। मगर हालात अत्यन्त खराब है। 42 विद्यालयों में करीब 253 कम्पूयटर है। अधिकांश खराब पड़े है। या उन कम्प्यूटर की सुध लेने वाला ही कोई नहीं है। इसके भी कई कारण है।


छोटी-छोटी तकनीकि परेशानी धीरे-धीरे बड़ी होती चली गई। दूसरा प्रशिक्षित शिक्षक नहीं है। विद्यालयों में मास्टर ट्रेनर भी बनाए गए। चंद दिन मास्टर ट्रेनर बनने वाले शिक्षक कम्प्यूटर का ज्ञान स्वंय भी ढंग से नहीं ले सके तो बच्चों को क्या दे पाएंगे। विद्यालयी शिक्षा निदेशक पुष्पा मानस ने जिला शिक्षाधिकारी को भेजे अपने पत्र में भी स्पष्ट लिखा है कि विद्यालयों में निधि वर्षो से जमा है, शिक्षकों की अदूरदर्शिता के कारण बच्चे कम्प्यूटर ज्ञान से वंचित रह रहे है। कम्प्यूटर ज्ञान के लिए समय विभाजन चक्र में नहीं दिया जा रहा है। यही वजह है कि कम्प्यूटर खराब और बच्चे ज्ञान से दूर हो रहे है।


नियम के अनुसार कम्प्यूटर खराब होने या अन्य सुविधाओं की दशा में प्रधानाचार्य पांच से पंन्द्रह हजर रूपए तक की धनराशि और बजट के अनुसार ब्रॉड बैण्ड, इटरनेट, कम्प्यूटर मैमोरी एवं लैब में एग्जॉस्ट फैन लगाने का कार्य डीईओ की स्वीकृति लेकर किया जा सकता है, फिर भी हालात जस के तस हैं।


अपर जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक आरपी विश्वकर्मा स्वीकारते है कि अधिकांश विद्यालयों में कम्प्यूटर खराब होने पर बच्चे ज्ञान से वंचित हो रहे है। वे कहते है कि विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षक होना चाहिए, जिन्हें ट्रेनिंग दी गई वे ठीक से सीख नहीं सके है। वे कहते है कही कम्प्यूटर रखने के लिए कमरे नहीं है तो कही टूटे-फूटे कमरों में लैब बना दी गई है। अच्छे कमरों और संसाधन की व्यवस्था हो। मगर प्रधानाचार्य कम्प्यूटर ठीक कराने के लिए कदम नहीं बढ़ाते है, जब तक वे जगरूक नहीं होगे, तब तक बच्चे कम्प्यूटर ज्ञान के बिना ही पास आउट होते रहेंगे।
व्यवस्था को दुरूस्त करने की बात पर एडीईओ माध्यमिक ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

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