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खुशियां खिलती हैं यहां हाथों में

खुशियां खिलती हैं यहां हाथों में

चारों तरफ तीज का माहौल हो और मेहंदी लगे हाथ देखने को न मिलें, हो ही नहीं सकता। आज भी अनेक हाथों पर शुभ मानी जाने वाली मेहंदी फूल, पत्ती और बूटे आदि नाना डिजाइनों में हथेली पर  खिल उठती है। कमला नगर, रानी बाग, राजौरी गार्डन, करौल बाग आदि सभी बड़े-छोटे बाजारों में तीज के अवसर पर  मेहंदी लगाने वालों के यहां भारी भीडम् लगी है। बात यदि नव विवाहितों की हो तो उनमें तो अलग ही चाव है। बाजार में जब तीज की रौनक देखने निकले तो हाथों को फूल, पत्ती आदि सामान्य डिजाइनों से लेकर अरेबियन डिजाइन, मोटे बेल-बूटों वाले डिजाइन के साथ-साथ हाथों को नग, स्वरोवस्की, जरदोजी, कुंदन, कलरफुल शेड्स से सजी डिजाइनर मेहंदी से रचा हुआ पाया।

एल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की प्रमुख भारती तनेजा के अनुसार, अब डिजाइनर मेहंदी का ट्रैंड जोर पकड़ रहा है। ड्रेस और ज्वेलरी के रंग व डिजाइन के तालमेल वाले डिजाइन बनाने के साथ महिलाएं कलरफुल मेहंदी पसंद कर रही हैं। फैंटेसी मेकअप की तरह ही फैंटेसी मेहंदी  हाथों पर लगाई जा रही है, जो विभिन्न रंगों की शेड लिए होती है, जिन्हें बाद में कुंदन, स्वरोवस्की, रंग-बिरंगे नगों से सजाया जाता है।

अवंतिका मार्केट में मेहंदी लगाने वाले राम कुमार की मानें तो भले ही तीज का त्योहार सुहागिनों के लिए है, पर अविवाहित लडम्कियां भी मेहंदी लगवाने में पीछे नहीं हैं। खासतौर पर वे लड़कियां जिनकी शादी होने वाली होती है। कई लोग सावन के पूरे महीने हाथों पर से मेहंदी का रंग उतरने नहीं देते।

मेहंदी के डिजाइन पर भारती कहती हैं कि तीज के अवसर पर डिजाइन में कलश, गणेश, स्वस्तिक, मोर आदि को पसंद किया जाता है। अरेबियन स्टाइल की तरह मोटे फूल व बूटों के डिजाइन में शेड का ट्रैंड बढम् रहा है। चूंकि मानसून का समय है, इसलिए डिजाइनर मेहंदी लगाने से पहले पहले हाथ पर वॉटरप्रूफ बेस बनाया जाता है, उसके ऊपर आइब्रो पेंसिल से डिजाइन बना कर फैंटेसी मेकअप के रंगों से शेड किया जाता है। डिजाइन को सजा कर सिलर स्प्रे से उसे सील कर दिया जाता है।  

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