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क्रिएटिविटी मेरा जुनून है : मनोज कुमार

क्रिएटिविटी मेरा जुनून है : मनोज कुमार

भारतीय सिनेमा में राजकपूर और गुरुदत्त के बाद एक सच्चा और योग्य लेखक, निर्देशक और अभिनेता कोई है तो वह है मनोज कुमार। आज मनोज कुमार 74 वर्ष के हो गए हैं और जल्द ही वे एक नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने जा रहे हैं।
 
मनोज कुमार इस समय अपने समसामयिक धर्मेद्र और शशि कपूर के साथ फिल्मी करियर के 50वें वर्ष में हैं। मनोज कुमार कहते हैं, ‘सर्वशक्तिमान की दुआएं और अनगिनत प्रशंसकों का प्यार ही है, जिसने मुङो इतने लंबे समय तक बनाए रखा है। क्रिएटिविटी मेरा जुनून है।’ हाल ही में उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहेब फालके पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

पिछले दस वर्षो से अधिक समय से मनोज कुमार ने न किसी फिल्म का निर्माण किया है, न लेखन किया है और न ही कोई फिल्म निर्देशित की है। कई आलोचकों के अनुसार वह अब चुक चुके हैं। इस पर मनोज कुमार अपने होठों को कस लेते हैं और फिर सिगरेट का धुंआ छोड़ते हुए मुस्कराते हुए कहते हैं- मैं लोगों को कुछ भी सोचने से रोक नहीं सकता, पर मुझे इसकी परवाह नहीं है। इन बेकार की आलोचनाओं का मुझ पर असर नहीं होता। मेरी पिछली कुछ फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और मैं उस मानसिक  स्थिति और स्वास्थ्य में नहीं था कि लोगों के सामने आ पाता। अब मैं स्वस्थ हूं और एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। मैंने भारत-पाक जॉइंट वेंचर की योजना बनाई थी, पर राजनैतिक अस्थिरता और अनिश्चितता ने इस योजना को आगे बढने नहीं दिया। आने वाले दो महीनों के भीतर यदि सब कुछ सही रहा तो मैं दोबारा से अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए कैमरे के पीछे सक्रिय हो जाऊंगा। शूटिंग स्क्रिप्ट तैयार है और मैं फिलहाल कास्टिंग का काम कर रहा हूं। जीवन के इस पड़ाव पर मैं स्टार्स के पीछे-पीछे नहीं भाग सकता और न ही उनके द्वारा महंगे चार्ज को स्वीकार कर सकता हूं।

मैंने शाहरुख के खिलाफ मामला वापस ले लिया है और एक दूसरे के प्रति गहरी समझदारी के साथ हमने अपने रिश्ते को बरकरार रखा है। मैं अपनी स्क्रिप्ट सुनाने के लिए उनके समय का इंतजार कर रहा हूं और यदि वह सहमत होते हैं तो निश्चित ही हम एक साथ काम करेंगे। मैंने पहले ही शाहरुख को यह स्पष्ट कर दिया है कि मुझे उनसे किसी प्रकार की मदद नहीं चाहिए। यदि उन्हें मेरी स्क्रिप्ट पसंद आती है और वह मेरे अनुसार काम करने के स्टाइल से सहमति रखते हैं, तभी काम करें। यदि शाहरुख उपलब्ध नहीं होते हैं तो मेरी दो अन्य स्क्रिप्ट भी तैयार हैं, नौकरानी और ईश्वर तेरो नाम, अल्लाह तेरो नाम।

मनोज कुमार जो राष्ट्रवादी की छवि रखते हैं, अपनी आने वाली फिल्मों में भी देशभक्ति के ही करीब दिखाई देंगे, पर वह यह विश्वास दिलाते हैं कि ये फिल्म उनकी पहली फिल्मों से अलग होगी। मनोज कुमार यह भी कहते हैं- ‘मैं फिल्म में अभिनय नहीं करूंगा, क्योंकि फिल्म में मुझे अपने लिए सही चरित्र नहीं दिखाई दे रहा है।’ हरियाली और रास्ता, दो बदन और गुमनाम जैसी फिल्मों के हैंडसम व सभ्य यह अभिनेता इन फिल्मों में अपने गंभीर और मजबूत अभिनय के लिए पहचाना गया है। इसी कारण अक्सर इनकी तुलना  दिलीप कुमार से की जाती है। वह कहते हैं, ‘मैं दिलीप कुमार से बेहद प्रभावित हूं, पर मैंने कभी भी उनकी नकल नहीं की। यदि करता तो कभी भी फिल्म इंडस्ट्री में इतने लंबे समय तक कायम नहीं रह पाता।’

शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम में अपने स्तब्ध कर देने वाले निर्देशन कार्य के लिए पहचाने गए मनोज कुमार ने कभी भी गुमनाम का निर्देशन और मेरा नाम जोकर फिल्म का पहला आधा भाग लिखने का क्रेडिट नहीं लिया। इस बात का जिक्र होने पर वे कहते हैं, ‘मेरी ऐसी कई उपलब्धियां हैं, जिनका मैंने कभी क्रेडिट नहीं लिया। मेरे सह अभिनेता प्राण, नंदा और मेरे प्रिय बड़े भाई राजकपूर ने मुझे उस हर बात का क्रेडिट दिया, जो मैंने उनके लिए किया।’

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