DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक

खुलापन दो तरह का होता है। एक तो अग्रगामी खुलापन जो पाखंडों की कलई खोल समाज को आगे बढ़ाए। दूसरा होता है बेशर्मी और नंगई का खुलापन जो महज चौंका कर, विदा हो जाए। सच का सामना कराने का दावा करने वाले कार्यक्रमों का खुलापन कैसा है, आप खुद सोचिए। सवाल है कि किसी के नितांत निजी प्रसंग उघाड़ कर सोसाइटी को क्या हासिल होता है? एक व्यक्ति पब्लिसिटी या पैसे के लालच में अपनी प्राइवेसी की नुमाइश लगाए या अपना स्वयंवर रचाए तो समाज को क्या फायदा? ज्यादातर रियलिटी शोज का यही हाल है। विदेशी सीरियलों की निर्लज्ज नकल! न कोई ज्ञानवर्धन, न कोई सीख! बस दूसरों की जिंदगी में सार्वजनिक ताकझांक का सतही रोमांच! नारा सच दिखाने का, हकीकत में सब झूठ! ऐसे कार्यक्रमों को एक राष्ट्रीय खुसुर-पुसुर से ज्यादा क्या कहें?

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक