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प्रसाद की तरह बांटी जाती थी कूल ड्रिंक कॉफी

प्रसाद की तरह बांटी जाती थी कूल ड्रिंक कॉफी

युवाओं के बीच कूल ड्रिंक के नाम से मशहूर कॉफी हर मौसम में मूड को दुरस्त रखने में मदद करती है। शरीर पर अपने अच्छे—बुरे प्रभावों के कारण जब—तब चर्चा में आने वाली कॉफी एक समय में धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बांटी जाती थी। शरीर पर कॉफी के परिणामों के बारे में फिजीशियन डॉ़ अतुल गुप्ता बताते हैं कि हाल के शोधों ने प्रमाणित किया है कि नियमित तौर पर कॉफी पीने से टाइप 2 डायबिटीज को दूर रखने में मदद मिलती है।

गुप्ता ने बताया कि गर्म कॉफी के स्थान पर कोल्ड कॉफी का सेवन किया जाना चाहिए क्योंकि इससे एनीमिया का खतरा कम होता है। दूसरी ओर कई शोधों में वैत्रानिकों ने कॉफी के नकारात्मक प्रभाव गिनाते हुए इसे छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक भी बताया है।

मानसिक रोग विशेषत्र डॉ़ नवीन आहूजा बताते हैं कि कॉफी का नियमित सेवन शरीर को इसका आदी बना देता है। लत लगने और उसके बाद इसे छोड़ने पर अवसाद, सिर दर्द, मानसिक थकान और चिडम्चिड़ापन जैसी शिकायतों का सामना करना पड़ सकता है। कॉफी का अधिक सेवन हदय रोग के खतरे को भी बढ़ा देता है।

पिछले कई सालों से भारत में कॉफी की लोकप्रियता बढने के पीछे विदेशी कंपनियों का भी बड़ा हाथ रहा है। कई सालों से भारत में कई ऐसी कॉफी शॉप खुली हैं, जहां बैठ कर कॉफी पीना युवा अपनी शान समझते हैं। कैफे कॉफी डे में नियमित तौर पर जाने वाले हिंदू कॉलेज के छात्र अनिमेष बनर्जी ने बताया कि ऐसे स्टोर आने के बाद युवाओं के बीच कॉफी पीने का मजा दोगुना हो गया है। हालांकि इन जगहों पर कॉफी की कीमत कई गुना ज्यादा होती है, लेकिन यहां की गतिविधियों और बौद्धिक चर्चाओं के चलते छात्र कूल ड्रिंक का मजा लेने यहीं आना पसंद करते हैं।

युवाओं के बीच स्टेटस सिंबल बनी कॉफी को लगभग 1,000 साल पहले वर्तमान यमन में धार्मिक स्थानों पर प्रसाद की तरह बांटा जाता था। यमन के नागरिक कॉफी के बीजों से वाइन बनाते थे, जिसे किश्र कहते थे। इसी किश्र को धार्मिक समारोहों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता था। 16 वीं शताब्दी में कॉफी को पूरी तरह से मुस्लिम पेय माना जाने लगा, जिसके चलते इसे इथोपिया के ईसाई समुदाय ने प्रतिबंधितोघोषित कर दिया। प्रतिबंध लगभग 300 सालों तक चला।

पश्चिमी देशों में अब एक लोकप्रिय पेय मानी जाने वाली कॉफी को ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों में भी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। यूरोप में कॉफी की लोकप्रियता के चलते कई राजनीतिक दलों ने इसे विरोधी दलों के लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसके बाद राजनीतिक समारोहों में कॉफी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

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