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गाड़ी का लोन

बाजार में ग्राहकों के पास ऑटो लोन लेने के कई विकल्प मौजूद हैं। कई बैंक फ्लोटिंग रेट पर ग्राहकों को लोन मुहैया कराते हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोन के लिए बैंक का चुनाव करते समय कुछ बातों को ध्यान में जरूर रखें।

किसे चुनें

लोन लेते वक्त ग्राहक के मन में हमेशा इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति बनती है कि लोन को किस दर पर लिया जाए, फ्लोटिंग या फिक्सड। अकसर ग्राहक होम लोन को ऑटो लोन से जोड़कर देखते हैं। संरचना, समय के अनुसार दोनों लोन की स्थिति अलग-अलग होती है। सामान्यत: ऑटो लोन शॉर्ट टर्म होते हैं, ज्यादातर इस लोन को तीन से चार वर्ष की अवधि के लिए लिया जाता है। वहीं होम लोन दीर्घकालिक होते हैं, जिन्हें सामान्यत: दस वर्ष से ऊपर की अवधि के लिए लिया जाता है। इसलिए दोनों को अलग-अलग देखना चाहिए। चूंकि ब्याज दरों को लेकर बाजर में अस्थिरता रहती है, ऐसे में अगर आप ऑटो लोन को एक साल से कम की अवधि के लिए लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो फिक्सड रेट का विकल्प बेहतर रहेगा, वहीं तीन से चार वर्ष की अवधि के लिए फ्लोटिंग विकल्प अच्छा है। साथ ही ये चेक कर लें कि गाड़ी को फाइनेंस कराने पर अंत में अदा करने वाले पैसे पर कितना फर्क पड़ता है।

मार्जिन

ब्याज दरों में कमी करने से माíजन में फर्क आएगा। सामान्यत: डीलर के पास माíजन होता है, जिसके आधार पर ही वह ग्राहक को छूट देते हैं। ऐसे में दरों के कम होने से ग्राहकों को फायदा होने की उम्मीद है।

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