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फार्मेसी ने की सीएमएस के नोटिस की अवमानना

जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ.राजरानी कंसल के नोटिस की अवमानना करते हुए अस्पताल के फार्मेसी विभाग की ओर से महंगे इंजेक्शनों पर ‘नॉट फार सेल’ की मुहर नहीं लगाई जा रही है। हिन्दुस्तान में 18 जुलाई को छपी खबर ‘जिला अस्पताल के इंजेक्शनों में धांधली’  संज्ञान लेते हुए सीएमएस ने चीफ फार्मासिस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही इंजेक्शनों पर मुहर लगाने का भी आदेश दिया था, जिसे सिर्फ सस्ते इंजेक्शनों तक ही सीमित रखा गया है।


40 रुपए की कीमत के हाइड्रोकोरिस्टोन सोडियम सक्सीनेट इंजेक्शन और 55 रुपए के आईवीसी कैन्युला इंजेक्शन समेत ऐसे ही महंगे इंजेक्शनों व दवाओं पर नॉट फार सेल की मुहर नही लगाई जा रही है। यह हालत तब है जब सीएमएस की ओर से  अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट अमरनाथ को नोटिस जारी किया जा चुका है। नियमानुसार इंजेक्शनों की कालाबाजरी रोकने के लिए नॉट फॉर सेल की मुहर लगाई जनी अनिवार्य है। सीएमएस की ओर से सभी इंजेक्शनों पर मुहर लगवाने के आदेश जारी किए गए थे। डॉ. कंसल का कहना है कि सभी इंजेक्शनों की अब मैं खुद जंच करवाऊंगी और चीफ फार्मासिस्ट को नोटिस जारी किया जाएगा। शासनादेश के अनुसार अस्पताल के लिए निर्धारित दवाएं खरीदी जा सकती हैं मगर इसकी जांच के लिए भी अस्पताल में कोई नियम नहीं है।
नोटिस का पालन इस बार भी नहीं हुआ तो फार्मासिस्ट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अथॉरिटी के डीसीईओ अनिल राजकुमार का कहना है कि यह सही है कि जिला अस्पताल की दवाओं के लिए बजट अथॉरिटी ही देती है मगर इस मामले में जंच का आदेश मैं अपने स्तर से नहीं दे सकता हूं। सीईओ मोहिंदर ही इस मामले में जांच के आदेश दे सकते हैं।

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